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जनाब कासिम को नजर हुई मेहंदी, किया नौहा मातम

Fri, 28 Aug 2020 01:18 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2020 01:18 AM IST
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varanasi moharram news
इमाम हुसैन की ख्वाहिश थी कि वह भी हिंदुस्तान आएं, लेकिन उनकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। इमाम हुसैन की शहादत और हिंदुस्तान से लगाव का ही असर है कि उनकी अजादारी का अंदाज पूरी दुनिया में निराला है। ईरान और इराक में भी हिंदुस्तान की तरह इमाम हुसैन की अजादारी नहीं होती है। सातवीं मुहर्रम पर हजरात कासिम की याद में मेंहदी की नजर होती है।
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जनाब कासिम कर्बला के ऐसे शहीद थे जिनकी शादी शहादत से कुछ दिन पहले ही हुई थी। जनाब कासिम हजरत इमाम हसन के बेटे थे। बनारस में खास तौर पर कई तरफ से मेहंदी जुलूस निकाले जाते थे। परंतु इस बार कोरोना के कारण सामाजिक दूरी बनाए रखने के कारण जुलूस नहीं उठ पाए। इसी तरह दोषीपुरा में उठने वाला जुलूस भी नहीं उठा। बृहस्पतिवार को चौहट्टा लाल खां में छोटी मेहंदी और बड़ी मेहंदी के जुलूस की जगह मजलिस का आयोजन कर रवायत निभाई गई। हालांकि घर-घर के अजाखानों में हजरत कासिम की मेहंदी पर नजर रात 12 बजे कराई गई।
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शिया जमा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने बताया कि छोटी मेहंदी का जुलूस जस्टिस फजल ए अली के घर से उठ कर इमामबाड़े में समाप्त होता है। इसमें अंजुमन अबिदिया, अंजुमन नासिरुल मोमिनीन, अंजुमन हाशिमिया आदि नौहा मातम करती थीं। बड़ी मेहंदी का जुलूस इमामबाड़े चौहट्टा लाल खान से उठ कर सदर इमामबाड़े तक जाता था।
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