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वाराणसी : मंडियों में नहीं आ पा रहा दक्षिण भारत का आम, लाखों रुपये का कारोबार प्रभावित 

Fri, 30 Apr 2021 11:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 30 Apr 2021 11:24 PM IST
सार

पूर्वांचल की मंडियों में है 200 टन रोजाना आम की खपत, फल आढ़ती चिंतित
दक्षिण भारत से आता है तोतापरी, लाल गुलाब, बैंगन फली, संतन, गुलाब खास 

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Varanasi: Mango of South India is not able to come in the market, turnover of lakhs of rupees affected
demo pic - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

कोरोना काल के इस दूसरी लहर में फलों का राजा आम भी प्रभावित है। वाराणसी में पहडिय़ा मंडी सहित अन्य प्रमुख मंडियों में आम नहीं होने से व्यापारी चिंतित हैं। अप्रैल माह में दक्षिण भारत से आम नहीं आ पा रहा है। अब तक लाखों रुपये का कारोबार प्रभावित हो गया है। बनारस में सबसे पहले दक्षिण भारत का ही आम आता है।

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कच्चे आम को यहीं तीन से चार दिन में पकाकर आढ़ती पूर्वांचल सहित बिहार तक की मंडियों में बेचते हैं। आढ़तियों के अनुसार 200 टन लगभग आम की वाराणसी सहित पूर्वांचल और बिहार तक में रोजाना की खपत होती है। आढ़तियों के अनुसार दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के वारांगल, चेन्नई सहित हैदराबाद के आसपास आम का उत्पादन बहुत अच्छा होता है।
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दक्षिण भारत से आने वाले तोतापरी, लाल गुलाब, बैंगन फली, संतन, गुलाब खास, यह सब आम मार्च अंतिम और अप्रैल के पहले सप्ताह तक बनारस में आ जाता था। आम कारोबारियों के अनुसार दक्षिण भारत में आम तो तैयार है लेकिन पैकेजिंग और लोडिंग की समस्या के चलते नहीं आ पा रहा है। वहीं गाड़ी वालों का भाड़ा भी दोगुना है। 
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मैंगो शेक, लस्सी भी बनती है

Varanasi: Mango of South India is not able to come in the market, turnover of lakhs of rupees affected
demo pic - फोटो : अमर उजाला

दक्षिण भारत के इन आम से मैंगो शेक, आम लस्सी, अचार, मुरब्बा, चटनी बनाया जाता है। इस समय तो पुदीना और कच्चा आम की चटनी बहुत से घरों में बनाई जाती है। इसके अलावा मई के दूसरे सप्ताह में उड़ीसा से लंगड़ा, दशहरी, पश्चिमी बंगाल और बिहार के भागलपुर से भी आम की आवक शुरू होगी।

इन जगहों से भी आता है आम
यूपी के तमाम बेल्ट से बनारस में आम की आवक होती है। अप्रैल के बाद मई अंतिम सप्ताह में शाही आम तैयार होते हैं। इसमें लंगड़ा, दशहरी, फदली, चौसा हैं। बनारस का लंगड़ा, प्रतापगढ़, रायबरेली, बाराबंकी, फैजाबाद, मलिहाबाद, संदिला, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद का आम जून, जुलाई तक आता है। जुलाई से अगस्त के बीच में देहराूदन सहित पहाड़ी इलाकों से भी आम की आवक होती है। 

दक्षिण भारत से आम नहीं आ पा रहा है, वहां के कारोबारियों के अनुसार तोड़ाई, पैकेजिंग, लोडिंग के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। -किशन सोनकर, अध्यक्ष, वाराणसी प्रगतिशील सब्जी-फल व्यवसायी संघ
इस समय स्थिति ठीक नहीं चल रही है। आम की आवक प्रभावित है। दक्षिण भारत से आम की आवक काफी कम हो गई है। मई में पश्चिमी प्रदेश के जिलों से आम की आवक शुरू होगी तो थोड़ी राहत मिलेगी। -नारायण सोनकर, फल आढ़ती, पहडिय़ा मंडी

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