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Education: सेमेस्टर पूरा करने वाला यूपी का पहला संस्थान बना यूपी कॉलेज, पढ़ें- वाराणसी में शिक्षा से जुड़ी खबर
Wed, 17 Dec 2025 05:59 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 17 Dec 2025 05:59 PM IST
सार
यूपी कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सेमेस्टर परीक्षाएं सबसे पहले संपन्न कराने वाला यूपी का पहला शैक्षणिक संस्थान यूपी कॉलेज है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
विस्तार
विश्वविद्यालय बनने की राह और चाह में यूपी कॉलेज की एकेडमिक गतिविधियां समय पर काम करने लगी हैं। नए सेमेस्टर की कक्षाएं अगले साल 16 जनवरी को ही शुरू जाएंगी। वहीं, एक महीने में सेमेस्टर परीक्षा कराकर सप्ताह भर में सभी पेपर का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।
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28 नवंबर को शुरू हुई विषय सेमेस्टर (पहले, तीसरे और पांचवें ) की परीक्षा 29 दिसंबर को खत्म हो जाएगी, रिजल्ट 20 दिसंबर के बाद से ही जारी किए जाएंगे। जनवरी के पहले सप्ताह तक सभी परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। 18 दिन में मंगलवार तक यूपी कॉलेज की आधी सेमेस्टर परीक्षाएं खत्म हो गईं।
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कॉलेज प्रशासन का दावा है कि सेमेस्टर परीक्षाएं सबसे पहले संपन्न कराने वाला यूपी का पहला शैक्षणिक संस्थान यूपी कॉलेज है। प्राचार्य प्रो. डीके सिंह का कहना है कि यूपी कॉलेज प्रदेश का पहला संस्थान होगा जहां सबसे पहले सेमेस्टर परीक्षा कराकर रिजल्ट जारी कर दिए जाएंगे। सेमेस्टर परीक्षा को एक महीने के अंदर पूरा किया जा रहा है जिससे अगला सेमेस्टर समय से शुरू किया जा सके। विषम सेमेस्टर की समस्त प्रायोगिक परीक्षाएं नवंबर महीने में करा ली गईं। साथ ही शासनादेश के आधार पर मूल्यांकन कार्य भी उदय प्रताप कॉलेज परिसर में सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है।
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आईआईएम के समकक्ष और टॉप-10 में आने का लक्ष्य रखे बीएचयू का प्रबंध अध्ययन संस्थान : कुलपति
बीएचयू के प्रबंध अध्ययन संस्थान को भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रबंध संस्थान आईआईएम (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट) के समकक्ष खड़े होने का लक्ष्य रखना चाहिए। अपने क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के साथ प्रतिस्पर्धा करें। आगामी 3-4 वर्षों के भीतर बीएचयू का प्रबंधन संस्थान एनआईआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) रैंकिंग में शीर्ष 10 में स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य रखे। ये बातें कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मंगलवार को बीएचयू के प्रबंध भवन में आयोजित संस्थान के 10वें संस्थान दिवस समारोह में कहीं। इस दौरान कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने प्रबंध भवन के नए सेमिनार हॉल का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि इस तरह का संकल्प ही समारोहों को वास्तविक अर्थ देता है। उन्होंने संस्थान की क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि पं. मालवीय जी की परिकल्पना आज भी संस्थान को प्रेरित और सुदृढ़ करती है। कुलपति ने सतत सुधार, सामूहिक परामर्श, स्पष्ट मानक निर्धारित करने और संस्थान के समग्र विकास के लिए मिलकर कार्य करने की बात कही।
डॉ. अनुराग, प्रिया और विनोद सर्वश्रेष्ठ के लिए सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसरों, शोधार्थियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। डॉ. अनुराग सिंह को सर्वश्रेष्ठ शोध पुरस्कार (संकाय), प्रिया गुप्ता को सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी पुरस्कार और वरिष्ठ सहायक विनोद कुमार कन्नौजिया को सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार दिया गया। निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने स्वागत किया।
डॉ. अनुराग, प्रिया और विनोद सर्वश्रेष्ठ के लिए सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसरों, शोधार्थियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। डॉ. अनुराग सिंह को सर्वश्रेष्ठ शोध पुरस्कार (संकाय), प्रिया गुप्ता को सर्वश्रेष्ठ शोधार्थी पुरस्कार और वरिष्ठ सहायक विनोद कुमार कन्नौजिया को सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी पुरस्कार दिया गया। निदेशक प्रो. आशीष बाजपेयी ने स्वागत किया।
सांस्कृतिक विकास का माध्यम है बीएड कोर्स
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग में मंगलवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएड प्रशिक्षुओं को शिक्षण विधियों के साथ ही रंगमंच से जुड़ी जानकारी दी गई। मुख्य वक्ता डॉ. शुभ्रा वर्मा ने कहा कि बीएड एक ऐसा पाठ्यक्रम है, जिससे छात्रों को शैक्षिक के साथ-साथ सांस्कृतिक समझ विकसित होती है। विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. शुभ्रा ने कहा कि इसका उपयोग करके छात्रों की रचनात्मकता, संचार कौशल, आलोचनात्मक सोच और समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे सीखने का अनुभव अधिक जीवंत और भावनात्मक रूप से जुड़ाव वाला बनता है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र राम किया। नाट्य शिक्षा के लाभ व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन, दोनों में सफलता के लिए संचार कौशल सबसे महत्वपूर्ण कौशलों में से एक है। बीएचयू के प्रो. अरुण जैन ने कहा कि बीएड प्रशिक्षण से छात्रों को विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए एक अनूठा मंच मिलता है। संचालन डॉ. दिनेश कुमार, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योत्सना राय ने किया।
झारखंड स्थापना दिवस पुस्तिका का हुआ विमोचन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मंगलवार को कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने झारखंड प्रदेश स्थापना दिवस (15 नवंबर) पर हुए कार्यक्रमों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने स्थापना दिवस के उद्देश्यों के बारे में भी चर्चा की। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र, कार्यक्रम संयोजक प्रो. नंदिनी सिंह, प्रो. आनंद शंकर चौधरी, प्रो. संगीता घोष, एल्युमिनी सेल के निदेशक प्रो. नलिनी श्याम कामिल आदि मौजूद रहे।
झारखंड स्थापना दिवस पुस्तिका का हुआ विमोचन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मंगलवार को कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने झारखंड प्रदेश स्थापना दिवस (15 नवंबर) पर हुए कार्यक्रमों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने स्थापना दिवस के उद्देश्यों के बारे में भी चर्चा की। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्र, कार्यक्रम संयोजक प्रो. नंदिनी सिंह, प्रो. आनंद शंकर चौधरी, प्रो. संगीता घोष, एल्युमिनी सेल के निदेशक प्रो. नलिनी श्याम कामिल आदि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक विकास का माध्यम है बीएड कोर्स
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग में मंगलवार को आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएड प्रशिक्षुओं को शिक्षण विधियों के साथ ही रंगमंच से जुड़ी जानकारी दी गई। मुख्य वक्ता डॉ. शुभ्रा वर्मा ने कहा कि बीएड एक ऐसा पाठ्यक्रम है, जिससे छात्रों को शैक्षिक के साथ-साथ सांस्कृतिक समझ विकसित होती है। विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. शुभ्रा ने कहा कि इसका उपयोग करके छात्रों की रचनात्मकता, संचार कौशल, आलोचनात्मक सोच और समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे सीखने का अनुभव अधिक जीवंत और भावनात्मक रूप से जुड़ाव वाला बनता है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेंद्र राम किया। नाट्य शिक्षा के लाभ व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन, दोनों में सफलता के लिए संचार कौशल सबसे महत्वपूर्ण कौशलों में से एक है। बीएचयू के प्रो. अरुण जैन ने कहा कि बीएड प्रशिक्षण से छात्रों को विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए एक अनूठा मंच मिलता है। संचालन डॉ. दिनेश कुमार, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योत्सना राय ने किया।