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बनारसः बवाल को बीते दो साल, नहीं बदला जिला जेल का हाल

Mon, 02 Apr 2018 11:02 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 02 Apr 2018 11:02 AM IST
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Varanasi district jail system is not correct after two years of chaos
Varanasi district jail - फोटो : file photo
वाराणसी जिला कारागार में दो साल पहले दो अप्रैल को साढ़े सात घंटे तक मारपीट, पथराव, आगजनी और हवाई फायरिंग हुई थी। इस बवाल की विभागीय, मजिस्ट्रेटियल और न्यायिक जांच कराई गई।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के तत्कालीन जेल मंत्री बलवंत सिंह रामू वालिया ने जिला कारागार का दौरा कर बंदियों से बातचीत की। मगर, इन सारी कवायदों के बावजूद जिला कारागार के हालात जस के तस हैं। उपद्रव में खराब हुए सीसीटीवी कैमरे दो साल बाद भी दुरुस्त नहीं किए जा सके हैं।
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वहीं, टू जी सिम पर अंकुश लगा सकने वाले जैमरों के लगे होने के कारण अब भी थ्री जी और फोर जी सिम से बंदी धड़ल्ले से बातचीत करते रहते हैं। जिला जेल की क्षमता 747 बंदियों की है लेकिन रविवार को यहां 1815 बंदी निरुद्ध थे।
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दो अप्रैल 2016 को हुए बवाल के पीछे का तात्कालिक कारण पेशी पर बंदियों को ले जाए जाने के दौरान बंदीरक्षकों द्वारा पैसा मांगना और न मिलने पर मारपीट करना बताया गया था।

इसके अलावा गुणवत्ता युक्त भोजन का न मिलना, सुविधाओं के बदले जेल कर्मियों द्वारा अवैध वसूली किया जाना और बंदियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी उपद्रव के अहम कारण थे।

हालांकि, जेल की चहारदीवारी के भीतर हुई इस घटना को लेकर जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक कोई सीख नहीं ली गई और सब कुछ जैसे का तैसा चल रहा है।

जेलर और डिप्टी जेलर का रोका गया था इंक्रीमेंट

Varanasi district jail system is not correct after two years of chaos
demo pic
जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि कैमरों को दुरुस्त करने और जैमर को अपग्रेड करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट मंजूर होते ही काम कराया जाएगा।

जिला जेल में हुए उपद्रव की विभागीय, मजिस्ट्रेटियल और न्यायिक जांच हुई थी। जिला जेल के तत्कालीन जेलर और वर्तमान में बरेली कारागार में तैनात अजय राय ने बताया कि हमारा और डिप्टी जेलर अजय राय का तीन साल के लिए इंक्रीमेंट रोका गया है।

इसके खिलाफ शासन में अपील की गई है। जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को कोई सजा नहीं मिली। न्यायिक जांच में हमें दोषी नहीं पाया गया। मजिस्ट्रेटियल और विभागीय जांच में दोषी पाया गया था।

तीनों जांचों का निष्कर्ष यही था कि जेल की प्रशासनिक व्यवस्था सही नहीं थी और बंदियों की पिटाई की जाती थी। इसके साथ ही जेल अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन नहीं कर सके।
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