वाराणसी: असि नदी में बने 11 भवनों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, सख्ती पर कइयों ने खुद हटाया अतिक्रमण
फोर्स को चितईपुर के इंदिरानगर में लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने सख्ती दिखाई तो कइयों ने खुद ही अपने अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया।
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अपनी पहचान खो चुकी काशी में असि नदी के पुनरुद्धार के लिए लंबी जद्दोजहद के बाद विकास प्राधिकरण ने एक कदम बढ़ाया है। नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण और 11 अवैध निर्माणों को विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन व नगर निगम की संयुक्त टीम ने जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप मचा है। वहीं प्रशासन की सख्ती का असर यह रहा कि कइयों ने खुद से ही अपने अवैध निर्माण को तोड़ना शुरू कर दिया।
संयुक्त टीम जेसीबी व भारी फोर्स के साथ जैसे ही चितईपुर के इंदिरानगर में अतिक्रमण ढहाने पहुंची तो लोगों का विरोध शुरू हो गया। बाद में उन्होंने सख्ती की तो पब्लिक पीछे हटी और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। इलाके की लाइट काटकर दोपहर 12 बजे से दिन में तीन बजे तक चली इस कार्रवाई के दौरान 11 भवन जमींदोज किए गए, जिसमें 4 दुकानें भी थीं।
वीडीए वीसी ईशा दुहन ने बताया कि नदी की तलहटी व ग्रीन एरिया को कब्जाने वाले नहीं बक्शे जाएंगे, चाहे वह कितना ही रसूख वाले क्यों न हो। कार्रवाई के दौरान अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम सुरेंद्र बहादुर, नगर निगम का प्रर्वतन दल, राजातालाब तहसील की राजस्व टीम, नगर निगम के कर अधीक्षक, वीडीए जेई एके अस्थाना, लंका थाने की फोर्स समेत अन्य मौजूद रहे।
सर्वे के बाद हुई पहली कार्रवाई
दरअसल, काशी की पौराणिक महत्व वाली असि नदी के पुनरुद्धार के लिए प्रशासन लंबे समय से कार्ययोजना बना रहा है। नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व विभाग, वीडीए, नगर निगम व वन विभाग की एक कमेटी भी गठित की गई थी। बीते चार माह में सर्वे कराने के बाद यह पहली कार्रवाई हुई है, जिससे नदी कब्जाकर मकान बनाने वालों में हड़कंप है। उधर, एनजीटी ने भी नदी के स्वरूप को लेकर गाइडलाइन जारी किया है, जिससे कार्रवाई करने में प्रशासन को बल मिला है।