Varanasi News: दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट बनाए जाएंगे दिव्यांग फ्रेंडली; 1.05 करोड़ रुपये जारी
Varanasi News: वाराणसी के दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट को दिव्यांग फ्रेंडली बनाया जा रहा है। 1.05 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत रैंप और अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यूपीपीसीएल की देखरेख में चल रहे कार्य के पूरा होने पर दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और अन्य श्रद्धालुओं के लिए घाटों तक पहुंच आसान होगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी के प्रमुख गंगा घाटों को दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाया जा रहा है। इसके तहत दशाश्वमेध, हरिश्चंद्र और अस्सी घाट को दिव्यांग फ्रेंडली बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की देखरेख में रैंप और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद दिव्यांगजन बिना किसी कठिनाई के घाटों तक पहुंच सकेंगे और गंगा स्नान का लाभ उठा सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, तीनों घाटों पर निर्माण कार्य जारी है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रमुख घाटों पर भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। रैंप निर्माण से न केवल दिव्यांगजन बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी घाटों तक पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही गंगा घाटों के आसपास उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
भाजपा दिव्यांग प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक एवं राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. उत्तर ओझा ने बताया कि काशी आने वाले श्रद्धालुओं की पहली प्राथमिकता बाबा विश्वनाथ के दर्शन और दूसरी गंगा स्नान होती है। उन्होंने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ धाम पहले से ही दिव्यांग फ्रेंडली है, लेकिन गंगा घाटों पर ऐसी सुविधाओं का अभाव था। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घाटों को दिव्यांगजन के अनुकूल बनाने की पहल की है।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए सरकार ने 1.05 करोड़ रुपये जारी किए हैं। सबसे पहले अस्सी घाट पर रैंप का निर्माण कराया गया, जिसके बाद अब दशाश्वमेध और हरिश्चंद्र घाट पर भी कार्य तेजी से चल रहा है। उनका कहना है कि यह पहल केवल दिव्यांगजनों की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी को सभी के लिए सुलभ और समावेशी धार्मिक एवं पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।