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दूधिया रोशनी से नहीं नहा सका बनारस, जापान के पीएम के आगमन पर शुरू हुआ था काम
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 22 Jun 2017 02:13 AM IST
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दूधिया रोशनी
- फोटो : self
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जितनी तेजी से बनारस में दूधिया रोशनी के लिए एलईडी लगाने का काम शुरू हुआ था, गति उतनी ही धीमी हो गई है। लापरवाही का आलम यह है कि जो काम छह माह में पूरा हो जाना था, एक साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है।
कार्यदायी संस्था और नगर निगम की लापरवाही के चलते ऊर्जा संरक्षण की दिशा में होने वाला यह महत्वपूर्ण काम अधूरा पड़ा है। एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को ऊर्जा संरक्षण और दूधिया रोशनी के लिए एलईडी बल्ब लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
इससे पहले प्रयोग के तौर पर एलईडी लाइट लगाने का काम 12 दिसंबर, 2015 को जापान के पीएम शिंजो अबे और प्रधानमंत्री मोदी के काशी आगमन पर हुई थी। इसके बाद नगर निगम सदन में लाइट बदलने और नई लाइट लगाने का मसला पास होने के बाद कंपनी को काम दिया गया।
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ईईएसएल को शहर में 36 हजार 770 हजार लाइटें अक्तूबर, 2016 तक लगा देनी थी। अब तक 29 हजार 450 लाइटें ही लगाई जा सकी हैं।
एलईडी लाइटें लगाने के पीछे उद्देश्य यह था कि नगर निगम का सालाना 24 करोड़ बिजली का बिल 12 करोड़ हो जाए।
कंपनी से नगर निगम का 20 मई, 2016 को करार हुआ। छह महीने में काम पूरा करना था। इस संदर्भ में आलोक प्रभार ललित मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि काम में देरी हुई लेकिन अब जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया है।
घाट किनारे हेरिटेज पोल लगाने की योजना थी। बाद में सिर्फ पीली एलईडी लाइटें लगाने पर सहमति बनी। इससे भी काम पर असर पड़ा।
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कार्यदायी संस्था और नगर निगम की लापरवाही के चलते ऊर्जा संरक्षण की दिशा में होने वाला यह महत्वपूर्ण काम अधूरा पड़ा है। एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को ऊर्जा संरक्षण और दूधिया रोशनी के लिए एलईडी बल्ब लगाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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इससे पहले प्रयोग के तौर पर एलईडी लाइट लगाने का काम 12 दिसंबर, 2015 को जापान के पीएम शिंजो अबे और प्रधानमंत्री मोदी के काशी आगमन पर हुई थी। इसके बाद नगर निगम सदन में लाइट बदलने और नई लाइट लगाने का मसला पास होने के बाद कंपनी को काम दिया गया।
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ईईएसएल को शहर में 36 हजार 770 हजार लाइटें अक्तूबर, 2016 तक लगा देनी थी। अब तक 29 हजार 450 लाइटें ही लगाई जा सकी हैं।
एलईडी लाइटें लगाने के पीछे उद्देश्य यह था कि नगर निगम का सालाना 24 करोड़ बिजली का बिल 12 करोड़ हो जाए।
कंपनी से नगर निगम का 20 मई, 2016 को करार हुआ। छह महीने में काम पूरा करना था। इस संदर्भ में आलोक प्रभार ललित मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि काम में देरी हुई लेकिन अब जल्द पूरा कराने का निर्देश दिया है।
घाट किनारे हेरिटेज पोल लगाने की योजना थी। बाद में सिर्फ पीली एलईडी लाइटें लगाने पर सहमति बनी। इससे भी काम पर असर पड़ा।