Varanasi News: बाढ़ में भी नहीं टूटेगा गंगा के 84 घाटों का संपर्क, यहां बन रहे रैंप; 41.25 करोड़ होंगे खर्च
Varanasi News: बाढ़ के दौरान गंगा घाटों का संपर्क बनाए रखने के लिए वाराणसी में 41.25 करोड़ रुपये की लागत से 35 घाटों पर प्लेटफॉर्म और रैंप बनाए जा रहे हैं। परियोजना पूरी होने पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक घाट से दूसरे घाट तक आने-जाने में सुविधा मिलेगी। डीएम ने कहा कि इससे बाढ़ में भी आवागमन सुचारु रहेगा।
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Flood in Varanasi: गंगा में बाढ़ के दौरान 84 घाटों का आपसी संपर्क बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है। करीब 41.25 करोड़ रुपये की लागत से 35 प्रमुख घाटों पर प्लेटफॉर्म और रैंप का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ के समय श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों का आवागमन सुगम बनाए रखना है, ताकि जलस्तर बढ़ने पर भी घाटों के बीच संपर्क बाधित न हो।
हर वर्ष गंगा में बाढ़ आने पर कई घाटों का आपसी संपर्क टूट जाता है। इससे दर्शन-पूजन, गंगा आरती और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की ओर से विभिन्न घाटों पर प्लेटफॉर्म और रैंप निर्माण का कार्य कराया जा रहा है।
निर्माण कार्य जिन प्रमुख घाटों पर चल रहा है, उनमें मीरघाट, प्रभु घाट, मानमंदिर घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, मानमहल घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, लाल घाट, गायघाट, राजघाट, राणा महल घाट और हनुमान घाट समेत कुल 35 घाट शामिल हैं। योजना पूरी होने के बाद बाढ़ के दौरान भी श्रद्धालु और पर्यटक एक घाट से दूसरे घाट तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
जानकारों के अनुसार, बाढ़ के समय सबसे अधिक परेशानी काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को होती है। ललिता घाट से दशाश्वमेध घाट तक जाने के दौरान मानमहल और मीरघाट के बीच का मार्ग काफी संकरा हो जाता है, जिससे आवागमन बाधित होता है। नए प्लेटफॉर्म और रैंप बनने से इस समस्या का समाधान होगा और भीड़ का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि बाढ़ के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और गंगा के घाटों का आपसी संपर्क बना रहे, इसे ध्यान में रखकर यह कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद बाढ़ के समय भी श्रद्धालु आसानी से दर्शन-पूजन और गंगा आरती में शामिल हो सकेंगे, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।