काशी विश्वनाथ धाम: स्पर्श दर्शन विवाद पर बोले कमिश्नर, नहीं बदली गई कोई व्यवस्था; वायरल पत्र की हो रही जांच
दारोगा के वेतन कटौती का पत्र वायरल होने का मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो मंदिर प्रशासन सक्रिय हो गया। मामले को लेकर मंडलायुक्त ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर
में दर्शन की जो व्यवस्था कई वर्षों से निर्धारित है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। मंदिर में सब श्रद्धालु दर्शन के अधिकारी हैं।
विस्तार
काशी विश्वनाथ धाम में बगैर प्रोटोकॉल स्पर्श दर्शन कराने वाले दारोगा आशीष सिंह के वेतन से 1500 रुपये कटौती से जुड़े मामले में मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने स्थिति साफ की है। उनका कहना है कि मंदिर के डिप्टी कलेक्टर का वाराणसी के पुलिस कमिश्नर के नाम एक ड्राफ्ट पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऐसा कोई पत्र कभी जारी नहीं हुआ। ट्रस्ट की तरफ से पुलिस सहित किसी भी विभाग को कोई शिकायती पत्र नहीं भेजा गया है। इसकी जांच कराई जा रही है। किसी ने शरारतपूर्ण तरीके से टाइप करके पत्र वायरल किया है।
दारोगा से वेतन कटौती का पत्र शुक्रवार को वायरल हुआ था। मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो मंदिर प्रशासन सामने आया। मंडलायुक्त ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन की जो व्यवस्था कई वर्षों से निर्धारित है, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। मंदिर में सब श्रद्धालु दर्शन के अधिकारी हैं। स्पर्श दर्शन का समय अलग-अलग महीने में अलग-अलग घंटों में निर्धारित है। सभी श्रद्धालु उस समयावधि में स्पर्श दर्शन कर सकते हैं। यह व्यवस्था निशुल्क है। कई वर्षों से निरंतर चल रही है।
इसे भी पढ़ें, काशी विश्वनाथ मंदिर: बिना प्रोटोकॉल स्पर्श दर्शन कराना दरोगा को पड़ा महंगा, अब वेतन से होगी कटौती
वर्षों पहले मंदिर में कम समय में बिना लाइन के दर्शन करने हेतु सुगम दर्शन व्यवस्था लागू हुई थी। इसमें 300 रुपये की सहयोग धनराशि से मंदिर के शास्त्री दर्शन कराते हैं। इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल व्यवस्था है। प्रोटोकॉल के अनुसार निशुल्क दर्शन कराया जाता है। इसके समय का निर्धारण करना कठिन होता है, इसलिए ये सामान्यतः पूरे दिन चलता है। वर्षों पूर्व चली आ रही व्यवस्था में न कोई नई व्यवस्था जोड़ी गई है और न घटाई गई है।
जॉइंट सेल की व्यवस्था गेट नंबर चार के भीतरी हिस्से में
मंडलायुक्त ने कहा कि जनवरी की शुरुआत से केवल प्रोटोकॉल व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास प्रारंभ हुआ है। गत 3-4 माह से विभिन्न विभागों द्वारा अपने कर्मचारियों व अधिकारियों के माध्यम से प्रोटोकॉल हेतु बनाए गए सेल के माध्यम से दर्शन न कराकर सीधे करा दिया जा रहा था। मंदिर की स्टेट लेवल सिक्योरिटी कमेटी ने काफी महीनों पहले इसके लिए ट्रस्ट, पुलिस और सीआरपीएफ की एक जॉइंट सेल की व्यवस्था की है जो गेट नंबर चार के भीतरी हिस्से में है। प्रोटोकॉल के लोग वहां से दर्शन हेतु भेजे जाते हैं। जो लोग वहां गलत आ जाते हैं उनसे 300 रुपये लेकर सुगम दर्शन कराया जाता है।
प्रोटोकॉल की व्यवस्था के उल्लंघन से होती है दिक्कत
मंडलायुक्त ने कहा कि प्रोटोकॉल की बनाई गई व्यवस्था का उल्लंघन करने से कामकाज अनुशासित नहीं रहता। जो लोग सुगम दर्शन करने में सक्षम हैं और प्रोटोकॉल के अंतर्गत नहीं आते, उनके इस प्रकार निशुल्क दर्शन से मंदिर की आय में फर्क पड़ता है। मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन जिन विभागों के माध्यम से ज्यादा होते हैं उनको कहा गया था कि प्रोटोकॉल के नाम पर अन्य लोगों को दर्शन न कराएं और उस पर रोक लगाएं।
अखिलेश यादव ने किया था ट्वीट
चौक थाने के दरोगा आशीष सिंह बीते चार जनवरी को पांच श्रद्धालुओं को बगैर प्रोटोकॉल पर्ची या सुगम दर्शन पर्ची के बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन कराए थे। इसे लेकर पांच जनवरी को काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू कुमार ने उनके वेतन से कटौती कर प्रोटोकॉल की धनराशि न्यास के कोष में जमा कराने का अनुरोध पुलिस आयुक्त से किया था। छह जनवरी को यह प्रकरण सार्वजनिक हुआ तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट किया, सुना है वीआईपी दर्शन करवाने गए एक पुलिसकर्मी को जुर्माने के रूप में अपनी जेब से टिकट का पैसा देने का आदेश वाराणसी के डिप्टी कलेक्टर साहब ने पारित किया है।