{"_id":"58cecdfd4f1c1b2f4a1a1220","slug":"varanasi-cheers-and-celebrate-in-yogi-adityanath-cabinet-two-ministers-from-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में काशी की जय-जय, अरसा बाद हुआ है कुछ ऐसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल में काशी की जय-जय, अरसा बाद हुआ है कुछ ऐसा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 19 Mar 2017 11:59 PM IST
विज्ञापन
अरसा बाद यूपी सरकार में बनारस के दो मंत्री
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के मंत्रिमंडल में अरसा बाद बनारस को खास तरजीह मिली है। इसे जिले की आठों सीटें जीतने का तोहफा माना जाए या पीएम नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने की वजह। इस बार यूपी के मंत्रिमंडल में भोले की नगरी से दो मंत्रियों को एक साथ प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है।
इससे पहले 1997 में कल्याण सिंह सरकार में इस जिले के तीन नेताओं ने मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी संभाली थी। 1957 में भी बाबू संपूर्णानंद सीएम और उनकी कैबिनेट में पं. कमलापति त्रिपाठी मंत्री थे।
बाबू संपूर्णानंद जैसा सीएम देने वाली शहर दक्षिणी सीट से इस बार पहले ही दांव में विधायक चुने गए नीलकंठ तिवारी को राज्यमंत्री बनाया जाना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
विज्ञापन
यूपी के मंत्रिमंडल में वैसे तो 1952 में गठित हुई पहली विधानसभा से ही काशी का प्रतिनिधित्व रहा है। महंत आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में एक साथ दो नए चेहरों को जगह देकर काशी को बड़ा तोहफा दिया गया है।
शहर दक्षिणी से सात बार के विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी की जगह चुनाव जीते नीलकंठ तिवारी को पहली बार में ही राज्यमंत्री बनाकर योगी सरकार ने जहां दक्षिणी का मान रखा है।
विज्ञापन
इससे पहले 1997 में कल्याण सिंह सरकार में इस जिले के तीन नेताओं ने मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी संभाली थी। 1957 में भी बाबू संपूर्णानंद सीएम और उनकी कैबिनेट में पं. कमलापति त्रिपाठी मंत्री थे।
विज्ञापन
बाबू संपूर्णानंद जैसा सीएम देने वाली शहर दक्षिणी सीट से इस बार पहले ही दांव में विधायक चुने गए नीलकंठ तिवारी को राज्यमंत्री बनाया जाना राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
विज्ञापन
यूपी के मंत्रिमंडल में वैसे तो 1952 में गठित हुई पहली विधानसभा से ही काशी का प्रतिनिधित्व रहा है। महंत आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में एक साथ दो नए चेहरों को जगह देकर काशी को बड़ा तोहफा दिया गया है।
शहर दक्षिणी से सात बार के विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी की जगह चुनाव जीते नीलकंठ तिवारी को पहली बार में ही राज्यमंत्री बनाकर योगी सरकार ने जहां दक्षिणी का मान रखा है।
वहीं शिवपुर से चुनाव जीते अनिल राजभर को राजभर बिरादरी का दिल जीतने के लिए राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई है। जबकि पड़ोस के मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, चंदौली जिलों से फिलहाल किसी को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।
मायावती सरकार में किसी को नहीं मिली जगह
2012 के अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में सेवापुरी से विधायक चुने गए सुरेंद्र पटेल को राज्यमंत्री बनाया गया था। इससे पहले 2007 की मायावती सरकार में तो बाबा की नगरी से किसी को भी मंत्री पद नहीं मिला था।
2002 में मुलायम सिंह की सरकार में चिरईगांव से विधायक बने वीरेंद्र सिंह वन राज्य मंत्री बनाए गए थे। जबकि 1997 में कल्याण सिंह सरकार में श्यामदेव रायचौधरी कार्यक्रम क्रियान्वन मंत्री, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव हरीश जी वित्तमंत्री बनाए गए थे, जबकि लोकतांत्रिक कांग्रेस कोटे से वीरेंद्र सिंह कृषि, परिवहन राज्यमंत्री।
इससे पहले शतरुद्र प्रकाश, राजबलि तिवारी, बाबू प्रभु नारायण सिंह, राजनारायण, रुस्तम सैटिन सरीखे नेता बनारस से यूपी की मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
2002 में मुलायम सिंह की सरकार में चिरईगांव से विधायक बने वीरेंद्र सिंह वन राज्य मंत्री बनाए गए थे। जबकि 1997 में कल्याण सिंह सरकार में श्यामदेव रायचौधरी कार्यक्रम क्रियान्वन मंत्री, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव हरीश जी वित्तमंत्री बनाए गए थे, जबकि लोकतांत्रिक कांग्रेस कोटे से वीरेंद्र सिंह कृषि, परिवहन राज्यमंत्री।
इससे पहले शतरुद्र प्रकाश, राजबलि तिवारी, बाबू प्रभु नारायण सिंह, राजनारायण, रुस्तम सैटिन सरीखे नेता बनारस से यूपी की मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।