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UP News: एमएसएमई से 588 करोड़ लोन लेकर लापता हुए बनारस के 35 हजार उद्यमी, अब बैंक बकायेदारों को भेज रहे नोटिस

Tue, 23 Dec 2025 06:29 PM IST
प्रगति चंद अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।
अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 23 Dec 2025 06:29 PM IST
सार

Varanasi News: एमएसएमई से 588 करोड़ लोन लेकर बनारस के 35 हजार उद्यमी लापता हो गए। खादी और सूक्ष्म उद्योगों में सबसे बड़ी सेंध लगी। उधर बैंक अब बकायेदारों को नोटिस भेज रहे हैं। 
 

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Varanasi 35,000 entrepreneurs missing after taking loan worth ₹588 crore from MSMEs
MSME - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी जिले में 35 हजार से अधिक उद्यमी एमएसएमई की योजनाओं के अंतर्गत बैंकाें से 588.31 करोड़ रुपये लोन लेकर भूल चुके हैं। बैंक की ओर से इन सभी को नोटिस भेजा जा रहा है। इन बकायेदारों में कपड़े से लेकर सीमेंट कारोबारी, सरिया, हार्डवेयर, बुनकर, खादी समेत कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग के व्यापारी हैं। इन सभी को विभाग और बैंक के समन्वय से उद्योग और रोजगार के लिए लोन दिया गया था। इसके बावजूद अधिकतर ने लोन लेने के बाद उसकी एक किश्त तक जमा नहीं की।

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जिले में एमएसएमई की योजनाओं से 155106 लाेगों को 14355 करोड़ रुपये लोन दिए गए थे। इनमें से 35372 लोगों ने 588.31 करोड़ रुपये की किस्त नहीं जमा की। इनमें सबसे अधिक सूक्ष्म उद्योगों में खादी और ग्रामाद्योग से जुड़ी योजनाओं में 28 हजार लोगों का 439.88 करोड़ रुपये बकाया है। बैंक की ओर से इन खातों को एनपीए घोषित किया गया है। बैंक यदि इन रुपयों को रिकवर नहीं कर पाता है, तो यह राशि डूब जाएगी। इससे बैंक अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में एनपीए खातों की संख्या अधिक

बैंक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में एनपीए खातों की संख्या सबसे अधिक है। इसमें भी सरकारी योजनाओं से मिले लोन की संख्या सबसे अधिक है। एलडीएम अविनाश अग्रवाल बताते हैं कि बैंक यदि लोन के पैसे की रिकवरी नहीं कर पाते हैं, तो उसके अधिकारियों को स्टाफ अकाउंटेबिलिटी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

केस - 1
राजघाट के कपड़ा व्यापारी ने जनवरी में बैंक से 4.5 लाख का लोन लिया था। बैंक के अधिकारियों ने सभी डॉक्यूमेंट देखने के बाद लोन पास किया। 11 महीने बीतने के बाद भी उन्होंने लोन की एक किस्त नहीं जमा की।

केस - 2
जैतपुरा में पावरलूम चलाने के लिए एक बुनकर ने मार्च में पीएम विश्वकर्मा योजना से 4 लाख का लोन लिया। दिसंबर तक भी लोन की एक ईएमआई नहीं जमा की। बैंक के अधिकारी जब किस्त के रुपये लेने पहुंचे तो मुलाकात नहीं हो पाई। अब बैंक की ओर से नोटिस भेजा जा रहा है।

केस - 3
पिंडरा में डेयरी व्यापार के लिए कारोबारी ने फरवरी में 5 लाख रुपये का लोन लिया। छह किस्त समय से जमा की। इसके बाद बैंक के अधिकारी कारोबारी के घर और फॉर्म के चक्कर लगा रहे हैं।

किस योजना में कितना बकाया

सूक्ष्म (खादी ग्रामोद्योग समेत)
  • बकायेदार - 28268
  • बकाया राशि - 439.88 करोड़

लघु (उद्योग एवं सर्विस)
  • बकायेदार - 491
  • बकाया राशि - 72.78 करोड़
  • मध्यम (उद्योग एवं सर्विस)
  • बकायेदार - 30
  • बकाया राशि - 7.59 करोड़

अन्य (उद्योग एवं सर्विस)
  • बकायेदार - 6583
  • बकाया राशि - 68.06 करोड़
  • कुल बकाया
  • बकायेदार - 35372
  • बकाया राशि - 588.31 करोड़

अधिकारी बोले
लोन बकायेदारों को नोटिस भेजा जा रहा है। बैंकों को भी लोन देते समय सभी कागजात और भौतिक वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। -अविनाश अग्रवाल, एलडीएम
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