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वाराणसी : 113 वर्षीय झुलई पहलवान का निधन, प्राकृतिक विधि से करते थे जानवरों और इंसानों का उपचार
Sat, 01 May 2021 10:34 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 01 May 2021 10:34 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
आजादी की कहानी बच्चों को सुनाने वाले 113 वर्षीय झुलई प्रजापति पहलवान का शनिवार शाम सारनाथ स्थित सिंहपुर गांव में निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। पहलवान झुलई प्रजापति उन चंद लोगों में थे, जिन्होंने भारत को आजाद होते देखा था। अंग्रेजी हुकूमत व आजादी की कहानी झुलई प्रजापति अपने बरामदे में बैठ कर गांवों के बच्चों को सुनाते थे।
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लोगों के बीच वैद्य से पहचाने जाने वाले झुलई प्रजापति प्राकृतिक जड़ी बूटियों से निशुल्क चिकित्सा करते थे। साथ ही, हड्डïी और नसों के जानकर थे। उस जमाने में जब एक्स रे का कोई चलन नहीं था। वह छूकर हड्डिïयों की टूटी स्थिति को बता दिया करते थे और साथ ही जड़ी बूटियों के सहारे हड्डïी को जोड़ते वैद्य पहलवान के निधन से गांव में शोक की लहर है। इनका दाह संस्कार सरायमोहाना घाट पर किया गया। मुखाग्नि बड़े पुत्र गौरी शंकर ने दी। ये अपने पीछे 99 वर्षीय पत्नी, चार बेटे, आठ पोते, पोतियों, नातियों से भरा पूरा परिवार छोड़ गए।
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