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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां: जिस सम्मान पर देश को नाज, उसे खा रही दीमक; भारत रत्न के पद्म सम्मानों पर संकट

Fri, 21 Aug 2026 06:11 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 21 Aug 2026 06:11 AM IST
सार

भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की अमूल्य विरासत संरक्षण के अभाव में संकट में है। जर्जर घर में रखे उनके पद्म सम्मानों, शहनाई, तस्वीरों और रोजमर्रा के सामान पर धूल और दीमक का असर पड़ रहा है। परिवार में समन्वय की कमी से संग्रहालय बनाने की योजना भी अटकी हुई है। देश को गौरवान्वित करने वाली उनकी धरोहर अब संरक्षण और उचित देखरेख की बाट जोह रही है।

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Ustad Bismillah Khan Termites eating honor nation is proud of crisis looms over Bharat Ratna and Padma awards
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को मिले पद्म विभूषण सम्मान पर दीमक। - फोटो : संवाद

विस्तार

जिस शख्स ने शहनाई को शादी-ब्याह की चौखट से निकालकर दुनिया के सबसे बड़े संगीत मंचों तक पहुंचाया, उसी उस्ताद की राष्ट्रीय विरासत आज दीमक और बारिश से जूझ रही है। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को मिले पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान जर्जर हालत में पड़े हैं। काशी स्थित उनके पैतृक आवास में रखी उनकी शहनाई, शेरवानी, टोपी, तस्वीरों और रोजमर्रा की दूसरी निशानियों का भी संरक्षण नहीं हो पा रहा है। नमी और बारिश के बीच सामान लगातार खराब हो रहा है और पद्म सम्मानों पर दीमक लग गई है।

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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बेटी जरीना बेगम के अनुसार, उनके अब्बा की जो निशानियां घर में बची हैं, उन्हें सुरक्षित रखना मुश्किल होता जा रहा है। पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे सम्मान भी लंबे समय से खराब हालत में हैं। इन पर दीमक लग चुकी है और अब इन्हें देखकर यह पहचानना भी मुश्किल होने लगा है। 
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उस्ताद को मिले सम्मान केवल पद्म पुरस्कारों तक सीमित नहीं हैं। संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप, राजीव गांधी सद्भावना अवाॅर्ड और स्वाति संगीता पुरस्कार समेत कई महत्वपूर्ण सम्मान भी उनके घर में रखे हैं। उचित संरक्षण के अभाव में इनकी स्थिति भी बिगड़ रही है। यह केवल एक परिवार की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि भारतीय संगीत इतिहास से जुड़ी धरोहर है।

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जर्जर हो रहा वह घर, जहां बसी है उस्ताद की याद
सम्मानों के साथ उस्ताद के जीवन से जुड़ी तमाम वस्तुएं भी उसी घर में रखी हैं। उनका रहने वाला कमरा जर्जर हो चुका है। बारिश के दौरान घर में नमी बढ़ने से सामान को और नुकसान पहुंच रहा है। उस्ताद की शहनाई, शेरवानी, टोपी, पंखा, आलमारी, ताड़ का पंखा, खाने के बर्तन और देश-विदेश में उनके कार्यक्रमों के दौरान खींची गई तस्वीरें भी संरक्षण के अभाव में खराब हो रही हैं।

इन वस्तुओं की अहमियत इस लिहाज से भी अधिक है कि वे उस्ताद के जीवन, उनकी दिनचर्या और दशकों लंबी संगीत साधना की प्रत्यक्ष गवाह हैं। इनके नष्ट होने का अर्थ केवल पुराने सामान का खराब होना नहीं, बल्कि संगीत इतिहास के एक हिस्से का हमेशा के लिए खो जाना होगा।
 

संग्रहालय की पहल भी परिवार के समन्वय में अटकी
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की पहल भी पहले सामने आ चुकी है, लेकिन परिवार के सदस्यों के बीच समन्वय नहीं बनने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। परिवार के भीतर मतभेद और अलग-अलग राय के कारण उस्ताद की विरासत को एक जगह संरक्षित करने की कोशिशें अटकती रही हैं। जरीना बेगम का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच समन्वय बनाकर उस्ताद की निशानियों को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है।

कोशिश की जा रही है कि आपस में समन्वय बनाकर अब्बा की निशानियों को सहेजा जाए। जो पद्म सम्मान खराब हो गए हैं, उन्हें ठीक कराने के लिए सरकार से मांग की जाएगी। - जरीना बेगम, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बेटी

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