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यूपी की शिक्षा व्यवस्था, टीईटी में 90 से कम अंक फिर भी बन गए शिक्षक

Thu, 03 Aug 2017 10:36 AM IST
amarujala.com, written by संदीप सौरभ सिंह
amarujala.com, written by संदीप सौरभ सिंह Updated Thu, 03 Aug 2017 10:36 AM IST
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UP teacher education system, less than 90 marks in TET become teacher
सांकेतिक चित्र

वर्ष 2016 में 15 हजार और 16448 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में फर्जी अंक से मेरिट बढ़ाकर नौकरी पाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक नया खुलासा हुआ है। दोनों ही भर्तियों में लगभग 10 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने सामान्य वर्ग में टीईटी अंक 90 से कम होने पर भी नौकरी पा ली।

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मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की गरदन भी फंसती नजर आ रही है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सहजानंद राय ने जुलाई में तत्कालीन कमिश्नर से वर्ष 2015 से 2016 तक हुई 15 हजार और 16448 शिक्षकों की भर्ती में प्राथमिक स्कूलों में फर्जी तरीके से नौकरी पाने के बारे में दो लोगों की शिकायत की थी।
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इसमें बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों को भी आरोपित किया गया था। दोनों भर्तियों में जिले करीब 350 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। मामले की जांच अपर सांख्यकी अधिकारी सुनील सिंह ने की तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने लगा।
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विभिन्न स्कूलों में एक साल से नौकरी कर रहे लगभग 50 शिक्षक शक के दायरे में आ गए हैं। पहले तो खुलासा हुआ कि 15 हजार की शिक्षकों की भर्ती में कई अभ्यर्थी मेरिट में लगभग 80 फीसदी अंक प्राप्त कर छंट गए थे, वही 16448 शिक्षकों की भर्ती में लगभग 90 अंक पाकर शिक्षक बन गए।

अंक बढ़ाने के लिए फर्जी अंकपत्र का सहारा लिया गया था।  अभी ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा था कि दोनों भर्तियों में करीब 10 शिक्षक ऐसे मिले हैं जो सामान्य वर्ग में होते हुए भी टीईटी 90 से कम अंक के बाद भी चयनित होकर शिक्षक बन गए।
 

हाईस्कूल थर्ड डिवीजन, स्नातक में 92 फीसदी

UP teacher education system, less than 90 marks in TET become teacher
डेमो - फोटो : demo pic

जबकि कम से कम 90 अंक प्राप्त करना अनिवार्य था। दोनों मामलों में 10 ऐसे लोग हैं जिनके टीईटी में 86 से 89 फीसदी अंक हैं। ऐसा बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही संदेहास्पद शिक्षकों की संख्या 50 के आसपास पहुंचने लगी है।

भर्ती की विभागीय जांच लगभग पूरी होने वाली है। सूत्रों की माने तो जांच अधिकारी इसे जल्द ही जिलाधिकारी को सौंप कर चिह्नित शिक्षकों के वेतन पर तुरंत रोक लगाने की सिफारिश करेंगे। साथ ही जांच अधिकारी की माने तो अगर ऐसा हुआ तो ऐसे अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ भी जांच की सिफारिश की जाएगी।

 शिक्षक भर्ती जांच के दौरान कुछ ऐसे भी मिले हैं, जिन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट थर्ड डिवीजन पास की है। इसके बाद उन्होंने स्नातक में 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल कर लिए। ऐसे अभ्यर्थी भी जांच के दायरे में हैं।

उनके स्नातक के अंकपत्र को संदेह के दायरे में रखा गया है। सूची बनाई जा रही है। इसके बाद संबंधित विश्व विद्यालय से इसका सत्यापन कराया जाएगा। जांच अधिकारी विश्वविद्यालय जाकर भी जांच करेंगे।

 

दोनों भर्तिर्यों में किया अप्लाई, खाली रह गईं 37 सीटें

UP teacher education system, less than 90 marks in TET become teacher
डेमो - फोटो : demo pic

शासन की ओर से 2015 में 15 हजार और 2016 16448 शिक्षकों की भर्ती निकाली गई थी। किसी न किसी कारण से 15 हजार शिक्षकों की भर्ती टलती रही। भर्ती वर्ष 2016 के जून माह में जाकर पूरी हुई।

इस दौरान प्रदेश सरकार की ओर से 16448 शिक्षकों की भी भर्ती निकाल दी गई। 15 हजार वाली भर्ती में अप्लाई करने वाले अभ्यर्थियों ने 16448 की भर्ती में भी अप्लाई कर दिया। दूसरी भर्ती अगस्त माह में पूरी हुई।

नतीजा ये हुआ कि लगभग 37 शिक्षक ऐसे थे जो दोनों ही भर्तियों में चयनित हो गए। अब नौकरी सिर्फ एक भर्ती में कर रहे हैं। इससे ये 37 पद खाली ही रह गए। यदि ये भर्तियां समय पर हुई होती तो 37 और लोगों को भी सरकारी नौकरी मिल सकती थी।

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