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कर्तव्य: कहीं पहाड़ चढ़कर तो कहीं आठ किमी पैदल चलकर करेंगे मतदान; यहां बूथ पर जाने के लिए रास्ते ही नहीं
Thu, 30 May 2024 02:10 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 30 May 2024 02:10 PM IST
सार
आखिरी चरण का मतदान एक जून को होगा। यूपी की 13 सीटों पर वोटिंग होगी। इसमें सोभद्र जिला भी शामिल है। यहां मतदाता आठ किमी दूर पैदल चलकर वोट देने जाएंगे। सोनभद्र के तिलहर गांव और दुगोलिया बूथ पर जाने के लिए रास्ते नहीं है।
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राजस्व गांव तिलहर का दुर्गम पहाड़ी रास्ता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सोनभद्र के घोरावल ब्लॉक के दुगोलिया ग्राम पंचायत के राजस्व गांव तिलहर के आदिवासी मतदाता आठ किमी दूर पैदल चलकर वोट देने जाएंगे। दुगोलिया के प्राथमिक विद्यालय पर स्थित बूथ पर मतदान करेंगे।
दुगोलिया ग्राम पंचायत के तिलहर गांव में चार सौ पचास मतदाता हैं। इनके अलावा बेइसखावा टोला में भी मतदाता हैं। यहां आज तक सड़क नहीं बन पाई है। सड़क के अभाव में यह मतदाता आठ किमी पैदल चलकर अपने बूथ तक मतदान करने पहुंचेंगे।
तमाम समस्याओं के बाद भी गांव के लोग हमेशा से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। तिलहर गांव के आदिवासियों के लिए वन विभाग की पांच किमी लंबी पहाड़ी वर्षों से समस्या से घिरी रहती है।
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वन विभाग की जमीन के चलते न तो गांव को मुख्य मार्ग दुगोलिया से जोड़ने को सड़क बन पा रही है और न ही गांव में हर घर जल योजना का पानी पहुंच पा रहा है। दुगोलिया गांव में पानी की टंकी बनकर तैयार है, लेकिन सप्लाई नहीं हो रहा।
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दुगोलिया ग्राम पंचायत के तिलहर गांव में चार सौ पचास मतदाता हैं। इनके अलावा बेइसखावा टोला में भी मतदाता हैं। यहां आज तक सड़क नहीं बन पाई है। सड़क के अभाव में यह मतदाता आठ किमी पैदल चलकर अपने बूथ तक मतदान करने पहुंचेंगे।
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तमाम समस्याओं के बाद भी गांव के लोग हमेशा से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। तिलहर गांव के आदिवासियों के लिए वन विभाग की पांच किमी लंबी पहाड़ी वर्षों से समस्या से घिरी रहती है।
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वन विभाग की जमीन के चलते न तो गांव को मुख्य मार्ग दुगोलिया से जोड़ने को सड़क बन पा रही है और न ही गांव में हर घर जल योजना का पानी पहुंच पा रहा है। दुगोलिया गांव में पानी की टंकी बनकर तैयार है, लेकिन सप्लाई नहीं हो रहा।
गांव में एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती। प्रसव पीड़ा के साथ आदिवासी महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने के लिए परिजन आज भी चारपाई का सहारा लेते हैं। तिलहर गांव निवासी संतोष बैगा दुखी मन से कहते हैं कि नेता वोट के समय डिंग हाकेंलन... जीतते तिलहर के भुला जईहन।
प्रधान पति रामवृक्ष बैगा ने कहा कि लगभग साल भर पहले सड़क बनाने में बाधा बन रही वन विभाग की इस पहाड़ी के बदले ग्राम पंचायत की जमीन ट्रांसफर कर दी है, लेकिन क्या प्रगति हुई पता नहीं है।