UP By-Election 2020: धारा के विपरीत चलने की आदी है मल्हनी
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जौनपुर जिले की रारी (अब मल्हनी) में सर्वाधिक छह बार कांग्रेस को जीत मिली है। इसके बाद समाजवादी खेमे के पास यह सीट रही। कभी जनता पार्टी के रुप में वह यहां काबिज रहे तो कभी सपा के रुप में परचम लहराया। अब तक हुए चुनावों पर गौर करें तो यहां के वोटर हमेशा से धारा के विपरीत चलने के ही आदी हैं। देश-प्रदेश के माहौल से उनका मिजाज अलग ही रहा है।
आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में हुए चुनाव में पूरे देश में जेपी लहर चल रही थी। इस आंधी ने कांग्रेस के बड़े-बड़े किले ढहा दिए। अमूमन हर सीट पर जनता पार्टी के उम्मीदवारों को एकतरफा जीत मिली। तब भी यहां कांग्रेस बेहद मजबूती से लड़ी थी।
इस चुनाव में जनता पार्टी के राजबहादुर को 34730 वोट मिले तो कांग्रेस के सूर्यनाथ उपाध्याय 33511 मत प्राप्त कर पाए थे। महज 1219 वोटों से जीत-हार का सबसे कम अंतर इसी चुनाव में था। जनता पार्टी चुनाव तो जीत गई, लेकिन कांग्रेस ने उनके दांत खट्टे करने में कसर नहीं छोड़ी।
जेपी आंदोलन के बाद वर्ष 1991 में श्रीराम लहर उठी थी। आसपास की सभी सीटों पर इस लहर का व्यापक प्रभाव दिखा। भाजपा प्रत्याशियों को जीत मिली, लेकिन रारी में जीत जनता पार्टी के मिर्जा सुल्तान को हासिल हुई।
उन्हें 28659 वोट मिले, जबकि दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के अरुण सिंह 19851 मत प्राप्त कर पाए थे। भाजपा के माता सेवक उपाध्याय 19526 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 1993 में भी श्रीराम लहर का प्रवाह प्रचंड था। तब भी यहां बसपा के लालजी यादव 58680 वोट पाकर विजेता बने।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के माता सेवक उपाध्याय (29670) को लगभग दोगुने अंतर से हराया था। वर्ष 2002 में जब सूबे में सपा के पक्ष में माहौल था, तब निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह निर्वाचित हुए और वर्ष 2007 के चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत मिलने के दौरान भी रारी की सीट जदयू के खाते में आ गई थी। वर्ष 2017 के प्रवाहित प्रचंड मोदी-योगी लहर में मल्हनी के वोटरों ने सपा पर भरोसा जताया था।