संवेदनहीनताः जिंदा रहते इलाज को तरसाया, मौत के बाद पोस्टमार्टम के लिए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पोस्टमार्टम के इंतजार में मोर्चरी हाउस में पड़ा शव पिछले सात दिनों से बेकद्री झेल रही है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने कोरम पूरा कर पोस्टमार्टम कराने के लिए शहर कोतवाली पुलिस को लाश सौंप दी लेकिन पुलिस न जाने क्यों अब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। अज्ञात व्यक्ति की उम्र करीब 40 वर्ष के आसपास थी।
जिला अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक अज्ञात व्यक्ति को घायलावस्था में सितंबर 2017 को जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में भर्ती कराया गया था। उसके पैर में गंभीर चोट लगी थी और पैर सड़ गया था। जिस समय से उसको अस्पताल में भर्ती हुआ था।
उस समय भी उसे अस्पताल में इलाज के लिए तरसाया गया था। सेप्टिक से पीड़ित युवक की अस्पताल प्रशासन ने काफी उपेक्षा की और उसे एक कमरे में छोड़ दिया गया। अमर उजाला में खबर छपने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसकी सुध ली और उसकी मरहत पट्टी की लेकिन कोई भी उसका जानने वाला अस्पताल नहीं पहुंचा। अस्पताल के कर्मचारी ही उसकी देखभाल कर रहे थे।
एक वर्ष तक पीड़ा झेल रहे अज्ञात व्यक्ति की चार जनवरी को मौत हो गई लेकिन उसकी उपेक्षा खत्म नहीं हो सकी। उसकी मौत के बाद जिला अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने औपचारिकता पूरी कर शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए रिपोर्ट शहर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया। बावजूद इसके अब तक उसका पोस्टमार्टम नहीं हो सका। काफी दिनों तक शव मोर्चरी में रहने की वजह से बदबू कर रहा है।
पता लगाया जा रहा कि पोस्टमार्टम क्यों नहीं हुआ