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शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली में वांछित दो इनामी वाराणसी से गिरफ्तार, ऐसे कराते थे सेटिंग

Sun, 07 Jun 2020 07:47 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sun, 07 Jun 2020 07:47 AM IST
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two wanted arrested in teachers recruitment
पुलिस ने हिरासत में लिया। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली में वांछित दो आरोपियों को शनिवार को एसटीएफ ने वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र के आयर बाजार से गिरफ्तार किया। दोनों की शिनाख्त जौनपुर जिले के नेवढ़िया थाना के दुहावर निवासी अजीत चौहान और अजय चौहान के तौर पर हुई है। दोनों पर 15-15 हजार का इनाम घोषित था।
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दोनों के पास से दो मोबाइल और एक डोंगल बरामद हुआ। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 2018 में हुई धांधली का भंडाफोड़ बीते साल एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने किया था। इस मामले में कोलकाता निवासी प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार कर, लोकसेवा आयोग की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार, अशोक देव चौधरी और शैलेंद्र पटेल को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है।
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एसटीएफ के डिप्टी एसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि प्रकरण में वांछित अजीत और अजय के आयर बाजार में मौजूद होने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर अनिल सिंह के नेतृत्व में एसआई शमशेर बहादुर और बैजनाथ राम आदि की टीम ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को चोलापुर थाने की पुलिस को सौंप दिया गया है।
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गिरोह का सरगना अजय और अजीत ने बताया कि उनके गिरोह का सरगना चंदौली जिले के अलीनगर का संजय वर्मा उर्फ रिंकू है। अजीत ने बताया कि चंदौली के मुगलसराय थाना के घसरा (घरना) निवासी विनोद शर्मा से उसकी जान-पहचान थी। विनोद ने उससे कहा था कि यदि एलटी ग्रेड परीक्षा में किसी को पैसे के बदले एक दिन पहले पेपर चाहिए तो वह इंतजाम करा सकता है।

इस पर दोनों ने अभ्यर्थी खोजे, उनसे एक लाख एडवांस और 11 लाख रुपये परीक्षा के बाद देने की बात तय हुई। साथ ही अभ्यर्थियों से उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्र जमा कराए गए। इसके बाद विनोद ने उन दोनों को संजय वर्मा से मिलवाया। संजय और कोलकाता निवासी प्रिटिंग प्रेस मालिक कौशिक पहले से एक-दूसरे के संपर्क में थे।


परीक्षा के एक दिन पहले अभ्यर्थियों को यूपी कॉलेज गेट के समीप बुलाया गया। इसके बाद सभी को शैलेंद्र पटेल के दसनी गांव स्थित कौशल विकास केंद्र ले जाया गया। केंद्र में अभ्यर्थियों को 150 प्रश्न पत्रों में से 120 प्रश्न बताए गए। इसके बाद प्रश्नपत्रों को जला दिया गया, लेकिन अशोक चौधरी ने उसका वीडियो बना लिया था। अशोक के वीडियो बनाने की वजह से ही मामले का भंडाफोड़ हुआ।
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