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बीएचयू के दो प्रोफेसरों को मिला ‘प्रो. सीएनआर राव अवार्ड’
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 17 Jan 2017 09:33 PM IST
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बोले, सीनियर प्रोफेसर को अपनी थाती बनाकर रखें संस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के केमिस्ट्री विभाग के डॉ. जेजे जोशी हॉल में भारतरत्न प्रो. सीएनआर राव ने मंगलवार को बीएचयू के दो प्रोफेसरों को अपने ही नाम से शुरू उत्कृष्ट सम्मान से नवाजा। जियोलॉजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध करने पर प्रो. एनवी चलापति राव और प्रो. राजेश कुमार श्रीवास्तव को ‘प्रो. सीएनआर राव अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन साइंस रिसर्च’ से सम्मानित किया।
प्रो. एनवी राव को साल 2014 और प्रो. श्रीवास्तव को साल 2015 के लिए अवार्ड दिया गया है। अपने उद्बोधन में विख्यात वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव ने कहा कि हर संस्थान को अपने सीनियर प्रोफेसरों को थाती बनाकर संस्थान से जोड़ कर रखना चाहिए।
क्योंकि उनका अनुभव संस्थान के काम आता है। वो जितने अनुभवी होते हैं, विचार उतने ही परिपक्व।
असल मायने में बेस्ट रिसर्च इसी उम्र में निकलकर सामने आता है। विदेशों में लोग सीनियर फेलो व प्रोफेसरों को पकड़ कर रखते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों से शोध कर रहा हूं और वो अनवरत चल रहा है।
इस दौरान प्रो. राव ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र जीवन के दौरान उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को घाट पर शहनाई बजाते देखा करता था। कोई सुनने वाला नहीं होता था।
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मैंने पूछा था कि आपको कोई सुनने वाला नहीं, तब क्यों शहनाई बजा रहे हैं। इस पर उनका जवाब था कि भगवान के लिए बजाता हूं, उन्हें सुनाने के लिए। ठीक उसी तरह वैज्ञानिकों को भी शोध करते रहना चाहिए।
लैबोरेटरी में काम करते रहना चाहिए। हो सकता है शोध आप के लिए न सही, भावी पीढ़ी के लिए काम आए।
प्रोफेसर राव ने कहा कि हिंदुस्तान के शोध का स्तर गिर रहा है जबकि चीन और साउथ कोरिया शोध में आगे जा रहे हैं।
अध्यापकों से आह्वान किया कि वो उत्कृष्ट शोध करें। विद्यार्थियों को इसके लिए प्रोत्साहित करें।
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प्रो. एनवी राव को साल 2014 और प्रो. श्रीवास्तव को साल 2015 के लिए अवार्ड दिया गया है। अपने उद्बोधन में विख्यात वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव ने कहा कि हर संस्थान को अपने सीनियर प्रोफेसरों को थाती बनाकर संस्थान से जोड़ कर रखना चाहिए।
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क्योंकि उनका अनुभव संस्थान के काम आता है। वो जितने अनुभवी होते हैं, विचार उतने ही परिपक्व।
असल मायने में बेस्ट रिसर्च इसी उम्र में निकलकर सामने आता है। विदेशों में लोग सीनियर फेलो व प्रोफेसरों को पकड़ कर रखते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षों से शोध कर रहा हूं और वो अनवरत चल रहा है।
इस दौरान प्रो. राव ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जिक्र करते हुए कहा कि छात्र जीवन के दौरान उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को घाट पर शहनाई बजाते देखा करता था। कोई सुनने वाला नहीं होता था।
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मैंने पूछा था कि आपको कोई सुनने वाला नहीं, तब क्यों शहनाई बजा रहे हैं। इस पर उनका जवाब था कि भगवान के लिए बजाता हूं, उन्हें सुनाने के लिए। ठीक उसी तरह वैज्ञानिकों को भी शोध करते रहना चाहिए।
लैबोरेटरी में काम करते रहना चाहिए। हो सकता है शोध आप के लिए न सही, भावी पीढ़ी के लिए काम आए।
प्रोफेसर राव ने कहा कि हिंदुस्तान के शोध का स्तर गिर रहा है जबकि चीन और साउथ कोरिया शोध में आगे जा रहे हैं।
अध्यापकों से आह्वान किया कि वो उत्कृष्ट शोध करें। विद्यार्थियों को इसके लिए प्रोत्साहित करें।