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कुछ लोगों को शाही टेंट में ठहराने के लिए कछुओं और जलीय जीवों को मार दिया: एनजीटी

Wed, 07 Feb 2024 04:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Feb 2024 04:10 AM IST
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Turtles and aquatic creatures killed to accommodate some people in royal tents: NGT
वाराणसी। गंगा किनारे टेंट सिटी बसाने और कछुआ अभयारण्य को गैर-कानूनी तरीके से डिनोटिफाइड करने के मामले में मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि गंगा किनारे कुछ लोगों को शाही टेंट में ठहराने के लिए कछुओं और जलीय जीवों को मार दिया। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से कहा कि आपके ऊपर कछुओं और जलीय जीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी है और आप ही उनको नष्ट कर रहे हैं। कछुए 50 हों, 100 हों या 1000। जितने भी मरे, यह क्रूरता है।
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एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल ने पर्यावरण मंत्रालय से सवाल किया। पूछा कि बिना केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुमोदन और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कछुआ अभयारण्य क्यों हटाया गया। एनजीटी ने कहा जिन सरकारी लोगों ने इस कछुआ अभयारण्य को हटाया, क्यों ना उनके विरुद्ध क्रूरता का मामला दर्ज किया जाए। एनजीटी की बेंच ने कहा कि किसी को भी सेंक्चुरी को विस्थापित करने का अधिकार नहीं है। सिर्फ इसकी सीमा में परिवर्तन किया जा सकता है। पर्यावरण मंत्रालय के अधिवक्ता से पूछा कि कछुओं को आपने शिफ्ट कैसे किया? इसका कोई जबाब नहीं मिला। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के तरफ से अधिवक्ता सौरभ तिवारी वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
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