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महालक्ष्मी का सोरहिया व्रत: क्यों खास है ये पर्व, 16 गांठ के धागे का क्या है महत्व ?
Sun, 04 Sep 2022 07:28 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 07:28 AM IST
सार
16 दिवसीय त्रिशक्ति महालक्ष्मी का व्रत शनिवार से शुरू हो गया है। चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी तिथि के साथ त्रिशक्ति महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद सोरहिया महापर्व शुरू होने पर श्रद्धालुओं में उत्साह है।
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लक्ष्मी कुंड में लगे सोरहिया मेले में उमड़े श्रद्धालु।
विस्तार
चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी तिथि के साथ त्रिशक्ति महालक्ष्मी का व्रत एवं पूजन का 16 दिवसीय अनुष्ठान शनिवार से आरंभ हो गया। कोरोना संक्रमण के दो साल बाद सोरहिया महापर्व शुरू होने पर श्रद्धालुओं में उत्साह है। सुबह से ही लक्ष्मीकुंड स्थित मंदिर में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। माता का दर्शन पूजन करने के साथ ही श्रद्धालुओं ने व्रत-अनुष्ठान का संकल्प उठाया।
धन-धान्य और पुत्र की कामना से शनिवार को लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया का पूजन आरंभ हुआ और मेला सज गया। त्रिशक्ति महालक्ष्मी को महिलाओं ने अर्पित कर 16 गांठ का धागा बांधा और 16 दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लिया। मां लक्ष्मी मंदिर के महंत ऋषि शंकर पांडेय ने माता के विग्रह को पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र और मुखौटा धारण कराया। मां भगवती के तीनों स्वरूपों का विधिवत पूजन हुआ। माता के विग्रहों का भव्य शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद माता के मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुआें के लिए खोल दिया गया। महिलाओं ने माता लक्ष्मी की प्रतिमा को मां के चरणों से स्पर्श कराया। 16 दिनों तक घर पर इसी प्रतिमा का पूजन होगा। 16 दिनाें तक व्रत रखने वाली महिलाओं ने मां को 16 गांठ का धागा अर्पित किया। 16 दाना चावल की 16 पुड़िया और 16 दूर्वा अर्पित कर माता के स्वरूप की 16 परिक्रमा कर विधान पूर्ण किया।
माता पार्वती ने महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया पूजन
महंत पं. अविनाश पांडेय सुट्टू महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए काशी में पूजन किया था। उन्होंने 16 कलश स्थापित कर पूजन किया और महालक्ष्मी प्रसन्न हुई थीं। उन्होंने माता पार्वती को पुत्रवती होने का वरदान दिया और कहा कि जो भी यह 16 दिनों का व्रत अनुष्ठान करेगा उसे धन-धान्य, सौभाग्य और पुत्र की प्राप्ति होगी।
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लक्ष्मीकुं ड गुलजार, सज गईं दुकानें
सोरहिया पूजन के साथ ही लक्ष्मीकुंड 16 दिनों के लिए गुलजार हो गया। मेला लगने से पूरे क्षेत्र में रौनक देखी गई। पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन ने सार्वजनिक आयोजन पर रोक लगाई हुई थी।
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धन-धान्य और पुत्र की कामना से शनिवार को लक्ष्मीकुंड पर सोरहिया का पूजन आरंभ हुआ और मेला सज गया। त्रिशक्ति महालक्ष्मी को महिलाओं ने अर्पित कर 16 गांठ का धागा बांधा और 16 दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लिया। मां लक्ष्मी मंदिर के महंत ऋषि शंकर पांडेय ने माता के विग्रह को पंचामृत स्नान कराकर नवीन वस्त्र और मुखौटा धारण कराया। मां भगवती के तीनों स्वरूपों का विधिवत पूजन हुआ। माता के विग्रहों का भव्य शृंगार किया गया। मंगला आरती के बाद माता के मंदिर का कपाट आम श्रद्धालुआें के लिए खोल दिया गया। महिलाओं ने माता लक्ष्मी की प्रतिमा को मां के चरणों से स्पर्श कराया। 16 दिनों तक घर पर इसी प्रतिमा का पूजन होगा। 16 दिनाें तक व्रत रखने वाली महिलाओं ने मां को 16 गांठ का धागा अर्पित किया। 16 दाना चावल की 16 पुड़िया और 16 दूर्वा अर्पित कर माता के स्वरूप की 16 परिक्रमा कर विधान पूर्ण किया।
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माता पार्वती ने महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया पूजन
महंत पं. अविनाश पांडेय सुट्टू महाराज ने बताया कि माता पार्वती ने महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए काशी में पूजन किया था। उन्होंने 16 कलश स्थापित कर पूजन किया और महालक्ष्मी प्रसन्न हुई थीं। उन्होंने माता पार्वती को पुत्रवती होने का वरदान दिया और कहा कि जो भी यह 16 दिनों का व्रत अनुष्ठान करेगा उसे धन-धान्य, सौभाग्य और पुत्र की प्राप्ति होगी।
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लक्ष्मीकुं ड गुलजार, सज गईं दुकानें
सोरहिया पूजन के साथ ही लक्ष्मीकुंड 16 दिनों के लिए गुलजार हो गया। मेला लगने से पूरे क्षेत्र में रौनक देखी गई। पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन ने सार्वजनिक आयोजन पर रोक लगाई हुई थी।