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वाराणसी में निभाई गई तुलसी और शालिग्राम के विवाह की परंपरा, उतारी आरती, मांगी कोरोना से मुक्ति की कामना
Wed, 25 Nov 2020 07:47 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Wed, 25 Nov 2020 07:47 PM IST
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तुलसी विवाह 2020
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में देवोत्थान एकादशी पर नमामि गंगे संस्था ने तुलसी और शालिग्राम के विवाह की परंपरा का निर्वहन किया। आरती उतारकर कोरोना से मुक्ति की कामना की गई और श्रद्धालुओं में तुलसी के पौधों का वितरण भी हुआ।
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बुधवार को नमामि गंगा के सदस्यों और पदाधिकारियों ने पंचगंगा घाट पर भगवती तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह संपन्न कराया। पंचगंगा घाट पर श्रद्धालुओं को तुलसी के पौधे देकर पुण्यलाभ किया। पर्यावरण संरक्षण एवं गंगा स्वच्छता हेतु सभी संकल्पित हुए।
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सदस्यों ने गंगा तट पर श्रद्धालुओं द्वारा की गई गंदगी को एकत्र किया तथा लोगों को गंदगी न करने के लिए प्रेरित किया। संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि देवोत्थान एकादशी का पर्व हमें धर्म के साथ कर्म का अवसर प्रदान करता है। भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने का यह पर्व एक प्रकार से अपने कर्तव्यों व दायित्वों के प्रति जागने और जगाने का पर्व है।
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भगवान के जागने से संसार में सकारात्मक शक्तियों का संचार होने लगता है। तुलसी पूजन की परंपरा भी वैज्ञानिक पक्ष को ही पुष्ट करती है। कफ जनित रोगों के शमन में तुलसी रामबाण जैसा असर रखती है। इस मौसम विशेष में तुलसी का सेवन सर्वाधिक लाभकारी माना गया है। इस दौरान शिवदत्त द्विवेदी, शिवम अग्रहरि, रामप्रकाश जायसवाल, प्रीति जायसवाल, सत्यम जयसवाल, सारिका गुप्ता, रश्मि साहू, सीता साहू, स्वाति जायसवाल, रूपा जायसवाल और परी जायसवाल ने भाग लिया।