काशी में व्यापारी बोले: सावन की भीड़ से कारोबार बढ़ा लेकिन जाम-पार्किंग और अव्यवस्था ने बढ़ाई परेशानी
अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में व्यापारियों ने कहा कि आस्था के साथ व्यापार का भी ध्यान रखा जाए। खुले में मीट की बिक्री पर रोक को लेकर कहा कि नियम सभी के लिए समान हो, सड़क पर दुकानें बंद करा दी लेकिन होटलों में बिक्री हो रही।
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सावन में काशी श्रद्धालुओं से गुलजार है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए देशभर से आ रहे भक्तों ने शहर के कारोबार को रफ्तार दी है। व्यापारियों का कहना है कि इसी भीड़ के बीच उनकी परेशानियां भी बढ़ गई हैं। कहीं रूट डायवर्जन और चौराहों के बार-बार बंद होने से कारोबार प्रभावित है तो कहीं टोटो, जाम और पार्किंग की समस्या से व्यापारी त्रस्त हैं। मीट की दुकानों पर कार्रवाई को लेकर भी व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं और नियमों को समान रूप से लागू करने की मांग की है। व्यापारियों ने कहा कि काशी में श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन शहर की अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारोबारियों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। व्यापारियों ने अपने मुद्दे रविवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में रखे।
मीट की दुकानें बंद करनी हैं तो पूरी तरह से कर दें। सिर्फ ऐसा न करें कि रेहड़ी-पटरी वालों की दुकानें बंद करा दी जाएं और होटलों में मीट मिल रही हो। मीट-मांस की दुकानें बंद करनी हैं तो सावन में शराब की दुकानें भी बंद करें। विरोध का लाभ नहीं है। प्रशासन ने सिर्फ इसी बात को सफलता मान लिया है कि कितने दर्शनार्थी आ रहे हैं। फूल-माला, होटल, पूजा-पाठ के अलावा भी तो व्यापार हैं और वे दुखी हैं। क्योंकि कभी कोई भी चौराहा बंद कर दिया जाता है तो कभी खोल दिया जाता है। - अजीत सिंह बग्गा, अध्यक्ष, वाराणसी व्यापार मंडल
रोपवे के लिए हम सभी व्यापारियों ने बहुत सुझाव दिए, लेकिन नहीं सुना गया। शहर में यदि टोटो के दो सौ परमिट हैं तो दो हजार चलते हैं। टेंपो में छह सवारी बिठाते हैं, इस पर कोई रोक नहीं है। मैंने एक पुलिस अफसर से कह दिया कि पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर पूरी सड़क पर बाइक और गाड़ियों का कब्जा है। इस पर उन्होंने मुझसे कहा कि बर्रे के छत्ते में हाथ कौन डाले। तो मैंने कह दिया कि ठीक है भाई, हम व्यापारी मच्छर हैं, करते रहिए हमारी बेइज्जती। - राकेश जैन, अध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
रूट डायवर्जन में सबसे अधिक व्यापारियों को दिक्कत है। हम कैसे जाएं, माल कैसे पहुंचाएं? या तो व्यापारियों के लिए कार्ड जारी हो, जिसे दिखाकर वे अपनी बाइक या स्कूटर दुकान तक ले जा पाएं। कम से कम हम व्यापार तो कर सकें, दिक्कत न हो। -दीप्तिमान देव गुप्ता, उपाध्यक्ष, वाराणसी युवा व्यापार मंडल
दुनिया के हर कोने से लोग आते हैं। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि व्यापार में कोई दिक्कत न हो और कांवड़ियों की भी सेवा होती रहे। ऐसा न हो कि कांवड़ियों को निकालते समय सड़क की पूरी लेन ही बंद कर दें। यह समाधान नहीं है। -विशाल मेहरा, मंत्री, महानगर युवा उद्योग व्यापार मंडल
रूट डिस्टर्ब नहीं होना चाहिए। इससे व्यापार प्रभावित नहीं होना चाहिए। मैं खुले में बिक रही मीट की दुकानों को बंद करने के फैसले का समर्थन करता हूं। धर्मनगरी है, पूरे देश से लोग आ रहे हैं। सड़क पर खुले में मीट बिकना हार्मफुल है। काशी विश्वनाथ में लाखों भक्त आते हैं, इससे व्यापार बढ़ा है। -राजेश भाटिया, अध्यक्ष, स्माल इंडस्ट्री एसोसिएशन
व्यापारियों के साथ पहले अफसर बैठक करते थे और समस्याएं पूछते थे, सुझाव लेते थे। इससे समस्याएं ही नहीं होती थीं। अब सिर्फ कोरम पूरा किया जाता है। वीवीआईपी कल्चर से व्यापार बहुत प्रभावित होता है। उसका एक टाइम शेड्यूल होना चाहिए। प्रशासन से अपील है कि गाड़ियों के काफिले लेकर आने वालों पर रोक लगे। -प्रतीक गुप्ता, अध्यक्ष, विश्ववेश्वरगंज भैरोनाथ व्यापार समिति
दिक्कत सिर्फ एक महीने की नहीं है। अब काशी में दिक्कत 12 महीने की है। एक बोरी माल कुंभ के दौरान दुकान में नहीं रख पाए। दुकान का किराया, बिजली का बिल कैसे दें। हम सिर्फ दर्शनार्थियों के दर्शन करते रह गए। विश्वेश्वरगंज में व्यापारियों की हालत खराब है। लोडिंग और अनलोडिंग नहीं हो पा रही है। रिंग रोड पर गाड़ियां खड़ी रह जाती हैं। हमें दो-दो दिन शहर में एंट्री नहीं देते हैं। - रमेश निरंकारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, काशी बिस्किट एंड कन्फेक्शनरी
टोटो वाले गिरजाघर पर, गीता मंदिर पर पचास से अधिक टोटो लगी रहती हैं। इसी सप्ताह की बात है कि दुकानदार ने टोटो को हटाने को कहा तो जो ठेकेदार उन्हें लगवाते हैं, वे सब लड़ने को तैयार हो गए। एक टोटो चालक शराब के नशे में धुत गालियां दे रहा था। मैं उधर से गुजर रहा था तो मैंने रोककर उसे टोका और व्यापारी के साथ खड़ा हुआ। क्या ये अराजकता पुलिसकर्मियों को नहीं दिखाई देती? - सुनील चौरसिया, अध्यक्ष, चौरसिया व्यापार मंडल
पर्यटक नगरी के लाभ भी हैं और नुकसान भी हैं। व्यापार को बचाने के लिए सड़क पर उतरना ही होगा। हम यहां रोजगार कर व्यापार करके परिवार चला रहे हैं। सरकार को चाहिए कि हमारा भी ख्याल रखे। पुलिस ने धन उगाही का धंधा बना लिया है। - धर्मेंद्र सिंह, आईटी सेल प्रभारी, युवा व्यापार मंडल
सावन में तो भीड़ आ ही रही है, लेकिन हर बार के हिसाब से काम चल रहा है। भीड़ का जो समाधान है, वह गंगा किनारे बनने वाली एलिवेटेड रोड ही है। - राहुल मेहता, अध्यक्ष, टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन
कांवड़ियों के आने वाले मार्ग पर मलदहिया से लहुराबीर के बीच तीन जगहों पर खंभे तो लगे हैं, लेकिन उनमें स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है। वहां बहुत अंधेरा रहता है। कई जगहों पर रास्ते खराब हैं। साफ-सफाई पर अधिक ध्यान देना चाहिए। - रजनीश कनौजिया, महामंत्री, महानगर उद्योग व्यापार मंडल
सावन में मेरी अपील है कि बनारस के लोग साफ-सफाई का ध्यान रखें। पान खाकर सड़क-गली में न थूकें। पूरे देश-दुनिया से लोग बनारस में आ रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि सड़क पर पार्किंग की व्यवस्था अच्छी करे, ताकि जाम न लगे। - सत्यप्रकाश, व्यापारी
पार्किंग को लेकर शहर में समस्या है। इसके लिए प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए। व्यापारी दुकान तक अपनी बाइक से पहुंच जाए, यह तो सुनिश्चित करें। हमें रोज काशी में ही व्यापार करना है। सरकार हमारा भी ध्यान रखे। - शैलेष सिंह, मंत्री, महानगर उद्योग युवा व्यापार मंडल