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Varanasi News: अब गर्मी में भी टमाटर की पैदावा, मुनाफा खूब
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अब तपती धूप और गर्मी में भी टमाटर की खेती की जा सकेगी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) शाहंशाहपुर वाराणसी के वैज्ञानिकों ने टमाटर की काशी अद्भुत और काशी तपस नाम की नई प्रजातियां विकसित की हैं। इसकी पैदावार सामान्य प्रजातियों से दोगुना ज्यादा है। इसे राज्य प्रजाति प्रमाणीकरण समिति से अनुमोदन मिल चुका है। जल्द ही केेंद्रीय प्रजाति प्रमाणीकरण समिति से अनुमोदन मिलने की उम्मीद है, फिर किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
गर्मी में टमाटर महंगा मिलता है। इसे देखते हुए ही आईआईवीआर के वैज्ञानिकों ने नई प्रजातियां विकसित की हैं। वैज्ञानिक डॉ. नागेंद्र राय के मुताबिक, टमाटर की ज्यादा पैदावार होगी तो जनता को महंगाई की मार नहीं झेलनी पड़ेगी। सामान्य दर पर ही टमाटर मिल जाएंगे। इन प्रजातियों को विकसित करने में 10-11 वर्ष लगे हैें। इसकी रोपाई फरवरी में होती है। अप्रैल से पैदावार मिलने लगती है। मई और जून में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच भी टमाटर की पैदावार सामान्य रहेगी। प्रति हेक्टेयर में 40 से 45 टन टमाटर की पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। नई प्रजाति से किसानों की आय बढ़ेगी। पैदावार ज्यादा होगी तो मुनाफा भी अच्छा मिलेगा। सामान्य प्रजातियों के साथ ऐसा नहीं है। प्रति हेक्टेयर में 18 से 24 टन टमाटर की पैदावार ही मिलती है। संवाद
खत्म होगी पहाड़ी राज्यों के टमाटर पर निर्भरता
वैज्ञानिक ने कहा कि गर्मी में पहाड़ी राज्यों से आने वाले शंकर प्रजाति के टमाटर निर्भर होना पड़ता है। इसकी कीमत ज्यादा होती है। कभी-कभी प्रति किलोग्राम टमाटर 90 से 100 रुपये में मिलने लगता है। काशी अद्भुत और तपस प्रजाति के बाजार में आने के बाद कीमतों के नियंत्रित रहने की उम्मीद है।
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80 से 90 दिन में मिलती है फसल
वैज्ञानिक के मुताबिक, किसान नई प्रजाति की नर्सरी जनवरी में लगा सकते हैं। पाली हाउस या नेट हाउस में अच्छी नर्सरी मिलती है। फरवरी में रोपाई की जाती है। 80 से 90 दिनों में फसल मिलने लगती है। एक पौधे से 30 से 40 किलो टमाटर की पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। परीक्षण के लिए कुछ किसानों को नर्सरी से पौधे दिए गए थे। किसानों को अच्छी फसल मिली है।
वर्जन
बाढ़ व सूखा रोधी सहित टमाटर की कई संकर प्रजातियों पर शोध चल रहा है। काशी अद्भुत और काशी तपस के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं। केंद्रीय एजेंसी से अनुमति मिलते ही बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।- डॉ. तुषार कांति बेहेरा, निदेशक आईआईवीआर
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गर्मी में टमाटर महंगा मिलता है। इसे देखते हुए ही आईआईवीआर के वैज्ञानिकों ने नई प्रजातियां विकसित की हैं। वैज्ञानिक डॉ. नागेंद्र राय के मुताबिक, टमाटर की ज्यादा पैदावार होगी तो जनता को महंगाई की मार नहीं झेलनी पड़ेगी। सामान्य दर पर ही टमाटर मिल जाएंगे। इन प्रजातियों को विकसित करने में 10-11 वर्ष लगे हैें। इसकी रोपाई फरवरी में होती है। अप्रैल से पैदावार मिलने लगती है। मई और जून में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच भी टमाटर की पैदावार सामान्य रहेगी। प्रति हेक्टेयर में 40 से 45 टन टमाटर की पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। नई प्रजाति से किसानों की आय बढ़ेगी। पैदावार ज्यादा होगी तो मुनाफा भी अच्छा मिलेगा। सामान्य प्रजातियों के साथ ऐसा नहीं है। प्रति हेक्टेयर में 18 से 24 टन टमाटर की पैदावार ही मिलती है। संवाद
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खत्म होगी पहाड़ी राज्यों के टमाटर पर निर्भरता
वैज्ञानिक ने कहा कि गर्मी में पहाड़ी राज्यों से आने वाले शंकर प्रजाति के टमाटर निर्भर होना पड़ता है। इसकी कीमत ज्यादा होती है। कभी-कभी प्रति किलोग्राम टमाटर 90 से 100 रुपये में मिलने लगता है। काशी अद्भुत और तपस प्रजाति के बाजार में आने के बाद कीमतों के नियंत्रित रहने की उम्मीद है।
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80 से 90 दिन में मिलती है फसल
वैज्ञानिक के मुताबिक, किसान नई प्रजाति की नर्सरी जनवरी में लगा सकते हैं। पाली हाउस या नेट हाउस में अच्छी नर्सरी मिलती है। फरवरी में रोपाई की जाती है। 80 से 90 दिनों में फसल मिलने लगती है। एक पौधे से 30 से 40 किलो टमाटर की पैदावार प्राप्त की जा सकेगी। परीक्षण के लिए कुछ किसानों को नर्सरी से पौधे दिए गए थे। किसानों को अच्छी फसल मिली है।
वर्जन
बाढ़ व सूखा रोधी सहित टमाटर की कई संकर प्रजातियों पर शोध चल रहा है। काशी अद्भुत और काशी तपस के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं। केंद्रीय एजेंसी से अनुमति मिलते ही बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।- डॉ. तुषार कांति बेहेरा, निदेशक आईआईवीआर