World Tobacco Day: तंबाकू से 25 बीमारियां, 40 तरह के कैंसर का खतरा, ये भी होती हैं दिक्कतें; जानें पूरी बात
Varanasi News: तंबाकू सेवन से केवल मुंह या फेफड़ों का कैंसर ही नहीं, बल्कि 25 प्रकार की बीमारियों और 40 तरह के कैंसर का खतरा होता है। बीएचयू में हर महीने मुंह के कैंसर के कई नए मरीज मिल रहे हैं। तंबाकू से प्रजनन स्वास्थ्य और बच्चों पर भी असर पड़ता है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जागरूकता और नई चिकित्सा सुविधाएं शुरू की गईं।
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तंबाकू का सेवन करने से केवल मुंह या फेफड़े का कैंसर ही नहीं होता है, बल्कि 25 तरह की बीमारी और 40 तरह के कैंसर का खतरा होता है। इसमें टीबी, माइग्रेन, हाथ पैर में झनझनाहट, मुंह का न खुलना, सांस फूलना शामिल है।
चिंता की बात यह है कि इन बीमारियों की चपेट में आने वाले अधिकांश लोगों की उम्र 18 से 45 साल के बीच है। बीएचयू के दंत चिकित्सा संकाय में तंबाकू नियंत्रण केंद्र में जांच, इलाज के साथ ही लोगों को बचाव के प्रति जागरूक भी किया जाता है। साथ ही तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित भी किया जाता है।
तंबाकू का सेवन न करने के प्रति जागरूकता के लिहाज से हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय के साथ ही सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग में चलने वाली ओपीडी में जांच के बाद हर महीने 20 नये मरीजों में मुंह के कैंसर की पुष्टि होती है। दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी का कहना है कि तंबाकू का सेवन एक दो नहीं बल्कि कई बीमारियों की जड़ है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
कम वजन के होते हैं बच्चे, जन्मजात बीमारियों का खतरा : आईएमएस बीएचयू स्त्री रोग विभाग की प्रो. ममता का कहना है कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं के होने वाले बच्चे की सेहत पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। औसतन हर महीने 5 महिलाएं ओपीडी में काउंसिलिंग के दौरान पकड़ में आती हैं। यह भी जानना जरूरी है कि मां के धूम्रपान करने से कम वजन के बच्चे के होने के साथ ही बच्चे को जन्मजात अन्य बीमारियों के होने का भी खतरा रहता है।
मनोचिकित्सा विभाग में कुलपति ने किया सुविधाओं का शुभारंभ : विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने मनोचिकित्सा विभाग में कई सुविधाओं का शुभारंभ किया। क्वांटिटेटिव इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी (क्यूईईजी), स्लीप लेबोरेटरी (पॉलीसोमनोग्राफी), इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी (ईसीटी), ट्रांसक्रैनियल डायरेक्ट करंट स्टिमुलेशन (टीडीसीएस), रिपीटेटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस), डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड शुरू किया।
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि क्यूईईजी सुविधा मस्तिष्कीय गतिविधियों के सही आकलन में सहायक होगी जबकि स्लीप लेबोरेटरी से नींद से संबंधित विकारों का समग्र मूल्यांकन होगा। ईसीटी सुविधा गंभीर मानसिक रोगों के लिए सुरक्षित और प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराएगी।