महात्मा बुद्ध की उपदेश स्थली में गूंजा तिब्बत की आजादी का नारा, शांति पदयात्रा करते दो तिब्बती युवक पहुंचे सारनाथ
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महात्मा बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ में तिब्बत की आजादी का नारा गूंजा और तिरंगे के साथ तिब्बत का झंडा फहराया गया। तिब्बत के स्वतंत्र राष्ट्र की घोषणा, चीन के सामानों का बहिष्कार एवं तिब्बत में चीन द्वारा प्राकृतिक संसाधनों को दोहन से बचाने के उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए दो तिब्बती युवक हिमाचल प्रदेश से नाथुला तक शांति पदयात्रा करते हुए शुक्रवार को सारनाथ पहुंचे।
यहां तिब्बती युवक तेनजिंग दोनदुप व तेनजिंग निमा का अकथा स्थित लाज में भारत-तिब्बत सहयोग मंच के लोगों ने स्वागत किया। शांति पद यात्रा पर निक ले तिब्बती युवकों ने बताया कि उन्होंने धर्मगुरु दलाई लामा के बताए अहिंसा व शांति मार्ग को ध्यान में रखते हुए यह पदयात्रा निकाली है।
तिब्बत व भारत के युवाओं को जागरूक करने के लिए दो नवंबर से हिमाचल से नाथुला दर्रे तक यात्रा निकाली गई है। युवाओं का केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के प्रो. जंपा समतेन, शिडोन, भिक्षु तेनजिंग नोरबू, डॉ. अनुराग त्रिपाठी, भिक्षु नवांग तेन्फेल, भिक्षु खेम्पो तेनजिंग, डॉ. तेनजिंग, डॉ. लक्पा छेरिंग, डॉ. उमेश सिंह ने माला व खाता पहनाकर स्वागत किया।
तेनजिंग दोनदुप ने बताया कि हिमाचल प्रदेश से नाथूला चीन सीमा तक पदयात्रा 90 दिनों में 2100 किलोमीटर की करनी है। इसमें से 1260 किमी. की यात्रा कर चुके हैं। यह लोग रविवार को बोधगया, सिलीगुड़ी, गंगटोक होते हुए सिक्किम के नाथूला चीन सीमा पर पदयात्रा समाप्त करेंगे।
तिब्बत को चीन कर रहा बर्बाद
दोनों तिब्बती युवकों ने आरोप लगाया कि चीन की विस्तारवादी नीति ने तिब्बत की परंपरा और संस्कृति को नष्ट तो किया ही है साथ ही भारत के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है। चीन जिस गति से वहां पर पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है उसका सबसे ज्यादा प्रभाव भारत पर पड़ने वाला है।