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Varanasi News: हजार लोगों को ऑक्सीजन देने वाले तीन प्लांटों को लगा जंग
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एंफीथियेटर मैदान में मई 2021 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से लगाए गए तीन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट के उपकरणों में जंग और जाले लगने लगे हैं। आसपास बड़ी घांसें और झाड़ियां उग आई हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में जब लोगों की सांसों पर संकट आया तो उन्हें प्राणवायु यानी ऑक्सीजन मुहैया दिलाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर सीएसआर के तहत 750 बेड का अस्थायी अस्पताल खोला गया था। इसमें 500 ऑक्सीजन वाले बेड जबकि 250 बेड पर आईसीयू की सुविधा थी। कोरोना के मामले न के बराबर हुए तो इसी साल जून में अस्पताल को बंद कर दिया गया। बेड, अन्य चिकित्सकीय उपकरण व अन्य सामान डीआरडीओ की टीम लेकर चली गई, लेकिन ऑक्सीजन प्लांट पर कोई फैसला नहीं हो सका। यहां लगे 11 किलोलीटर के तीनों ऑक्सीजन प्लांट से करीब 1000 बेड तक ऑक्सीजन आपूर्ति की क्षमता है।
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सीएचसी मिसिरपुर में चौकीदार के हवाले ऑक्सीजन प्लांट, शास्त्री अस्पताल व सीएचसी चोलापुर में हुआ बंद
वाराणसी। जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए गए थे, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसको चलाने के लिए स्थायी टेक्नीशियन नहीं है। कुछ जगहों पर तो चौकीदार ही प्लांट चला रहा है। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में स्थायी तकनीकी कर्मचारी के न होने की वजह से एमटीएस कर्मचारी को प्लांट चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। रामनगर शास्त्री अस्पताल में लगे 500 और 120 एलपीएम के दो ऑक्सीजन प्लांट में 120 एलपीएम वाला करीब डेढ़ साल से खराब है। इसको बनाने के लिए तकनीकी कर्मचारी नहीं मिल पा रहे है। जिसके कारण यह बंद है, जबकि 500 एलपीएम वाले से किसी तरह आपूर्ति की जा रही है। चिरईगांव में सीएचसी नरपतपुर में प्लांट चलाने के लिए कोई तकनीकी विशेषज्ञ न होने से यहां तैनात चौकीदार को ही संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। सीएचसी प्रभारी राजनाथ के अनुसार चौकीदार को प्रशिक्षित किया जा चुका है। देखरेख और टेस्टिंग के लिए टेक्नीशियन आते रहते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा गोद लिए गए सीएचसी हाथी बाजार, रोहनिया के सीएचसी मिसिरपुर में भी लगे प्लांट को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं है, यहां कर्मचारी ही उसे चला रहे हैं। मिसिरपुर के अधीक्षक डॉ. आरबी सिंहहेन ने बताया कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं चलाते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में कोरोना काल में लगा ऑक्सीजन प्लांट इन दिनों बंद पड़ा है। इसका बेड तक कोई कनेक्शन भी नहीं है।
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कोरोना की दूसरी लहर में जब लोगों की सांसों पर संकट आया तो उन्हें प्राणवायु यानी ऑक्सीजन मुहैया दिलाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर सीएसआर के तहत 750 बेड का अस्थायी अस्पताल खोला गया था। इसमें 500 ऑक्सीजन वाले बेड जबकि 250 बेड पर आईसीयू की सुविधा थी। कोरोना के मामले न के बराबर हुए तो इसी साल जून में अस्पताल को बंद कर दिया गया। बेड, अन्य चिकित्सकीय उपकरण व अन्य सामान डीआरडीओ की टीम लेकर चली गई, लेकिन ऑक्सीजन प्लांट पर कोई फैसला नहीं हो सका। यहां लगे 11 किलोलीटर के तीनों ऑक्सीजन प्लांट से करीब 1000 बेड तक ऑक्सीजन आपूर्ति की क्षमता है।
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सीएचसी मिसिरपुर में चौकीदार के हवाले ऑक्सीजन प्लांट, शास्त्री अस्पताल व सीएचसी चोलापुर में हुआ बंद
वाराणसी। जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए गए थे, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसको चलाने के लिए स्थायी टेक्नीशियन नहीं है। कुछ जगहों पर तो चौकीदार ही प्लांट चला रहा है। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में स्थायी तकनीकी कर्मचारी के न होने की वजह से एमटीएस कर्मचारी को प्लांट चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। रामनगर शास्त्री अस्पताल में लगे 500 और 120 एलपीएम के दो ऑक्सीजन प्लांट में 120 एलपीएम वाला करीब डेढ़ साल से खराब है। इसको बनाने के लिए तकनीकी कर्मचारी नहीं मिल पा रहे है। जिसके कारण यह बंद है, जबकि 500 एलपीएम वाले से किसी तरह आपूर्ति की जा रही है। चिरईगांव में सीएचसी नरपतपुर में प्लांट चलाने के लिए कोई तकनीकी विशेषज्ञ न होने से यहां तैनात चौकीदार को ही संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। सीएचसी प्रभारी राजनाथ के अनुसार चौकीदार को प्रशिक्षित किया जा चुका है। देखरेख और टेस्टिंग के लिए टेक्नीशियन आते रहते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा गोद लिए गए सीएचसी हाथी बाजार, रोहनिया के सीएचसी मिसिरपुर में भी लगे प्लांट को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं है, यहां कर्मचारी ही उसे चला रहे हैं। मिसिरपुर के अधीक्षक डॉ. आरबी सिंहहेन ने बताया कि चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं चलाते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में कोरोना काल में लगा ऑक्सीजन प्लांट इन दिनों बंद पड़ा है। इसका बेड तक कोई कनेक्शन भी नहीं है।
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