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हजारों महिलाएं अब भी चूल्हा फूंकने को मजबूर

Thu, 05 Jan 2017 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाल, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाल, वाराणसी Updated Thu, 05 Jan 2017 01:31 AM IST
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Thousands of women are still forced to breathe hearth
घरेलू गैस सिलेंडर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किचन को धुआं रहित बनाने की घोषणा तो कर दी पर अब भी हजारों महिलाएं चूल्हा फूंकने को मजबूर हैं। जिस लिस्ट के आधार पर उज्ज्वला कनेक्शन बांटा जा रहा है, उस लिस्ट में कई जरूरतमंदों के नाम ही नहीं हैं। वहीं लिस्ट में शामिल हजारों लोगों ने अभी तक इस कनेक्शन के लिए अप्लाई ही नहीं किया है। कई परिवार तो ढूंढने पर भी नही मिल रहे हैं। गैस एजेंसियों की टालमटोल के चलते भी गरीब जनता को यह सुविधा नही मिल पा रही है। इसके चलते योजना का आधा लक्ष्य भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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वाराणसी सहित पूरे देश में प्रधानमंत्री ने उज्ज्वला योजना शुरू की। आठ महीने पहले शुरू हुई इस योजना के लिए 2011 में सामाजिक, आर्थिक और जातीय आधार पर हुई जनगणना के आधार पर तैयार हुई एसईसीसी (सोसिओ इकोनॉमिक्स एंड कास्ट सेंसस 2011) लिस्ट की मदद ली जा रही है। वाराणसी में लगभग एक लाख 48 हजार लाभार्थियों को यह कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। आलम यह है कि आठ महीने में केवल 58,535 आवेदन भरे गए हैं जबकि इसके सापेक्ष 48,633 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। 90 हजार से ज्यादा लोगों को अब भी कनेक्शन नहीं मिल पाया है। एजेंसियां भी इस योजना के कार्यान्वयन में मनमानी कर रही हैं।
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कनेक्शन लेने पहुंच रहे लोगों को पहले तो मना कर दिया जा रहा है या फिर उनसे इतने कागजात मांग लिए जा रहे हैं की वह चाहकर भी कनेक्शन नहीं ले पा रहे हैं। हजारों जरूरतमंद परिवार तो उस लिस्ट में ही नहीं हैं, जिसके आधार पर उज्ज्वला कनेक्शन बांटे जा रहे हैं। लक्ष्य पूरा न होने के पीछे इंडियन ऑयल का तर्क है कि लोग आवेदन ही नही कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई परिवारों के पास पहले से ही कनेक्शन है। कंपनी का तो यहां तक दावा है कि लिस्ट में कई ऐसे परिवार दर्ज हैं जो खोजने पर नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने की वजह से तेल कंपनी पर लक्ष्य पूरा करने का जबरदस्त दबाव है और टीमें बनाकर लिस्ट में मौजूद परिवारों की तलाश की जा रही है।
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