{"_id":"6ae25e027d3a3d366b021aa0","slug":"this-time-the-moon-will-rise-six-minutes-earlier-women-will-observe-a-fast-of-1457-hours-for-unbroken-marital-bliss-varanasi-news-c-20-vns1021-1596769-2026-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: इस बार छह मिनट पहले होगा चंद्रोदय, अखंड सुहाग के लिए महिलाएं रखेंगी 14.57 घंटे का व्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: इस बार छह मिनट पहले होगा चंद्रोदय, अखंड सुहाग के लिए महिलाएं रखेंगी 14.57 घंटे का व्रत
विज्ञापन
वाराणसी। अखंड सुहाग, आरोग्य और दांपत्य सुख की कामना को लेकर महिलाएं बृहस्पतिवार को करवा चौथ का पावन निर्जला व्रत रखेंगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी तिथि पर सुहागिनें पूरे 14 घंटे 57 मिनट तक निर्जल उपवास रखकर विधि-विधान से शिव परिवार और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना करेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष व्रत अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध होगा क्योंकि यह पूरी तरह से भद्रा के दोष से मुक्त रहेगा।
ज्योतिषाचार्यों की गणना के मुताबिक, इस बार काशी में पिछले साल की तुलना में छह मिनट पहले ही चंद्रोदय हो जाएगा। पिछले वर्ष रात 8:03 बजे चंद्रमा के दर्शन हुए थे, जबकि इस बार शाम 7:57 बजे ही चंद्रदेव क्षितिज पर उदित हो जाएंगे। बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, मौसम में सक्रिय अर्नब चक्रवात का चंद्रोदय के निर्धारित समय पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और सभी व्रती महिलाएं समय पर अपना व्रत निर्विघ्न पूर्ण कर सकेंगी।
धार्मिक व ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार का करवा चौथ अत्यंत मंगलकारी संयोग लेकर आया है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि व्रत से एक दिन पूर्व 28 अक्तूबर को शाम 5:31 बजे भद्रा का आरंभ होगा, जो अगले दिन भोर में 4:27 बजे ही समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार व्रत वाले दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। इसके अतिरिक्त, 28 अक्तूबर को प्रातः 7:35 बजे पूर्व दिशा में शुक्र का उदय हुआ है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत फलदायी माना गया है। पर्व के दिन वरीयान योग, परिघ, पंच महापुरुष, बुधादित्य, पाराशरी राजयोग, मालव्य पंच, सरस्वती और अखंड सौभाग्य योग जैसे दुर्लभ शुभ योगों की शृंखला बन रही है।
विज्ञापन
16 शृंगार कर महिलाएं करेंगी शिव परिवार की पूजा
उत्तर भारत में करवा चौथ का विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। सुहागिनें सोलह शृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और प्रथम पूज्य श्री गणेश की आराधना करेंगी। पूजा के लिए चौकी पर पीली मिट्टी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) तथा गंगाजल से देव परिवार को भोग लगाया जाएगा। मिट्टी के टोंटीदार करवे, ढक्कन और लोटे से पूजन संपन्न होगा। हलवा, मिठाई और आठ पूड़ियों की अठावरी का नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। शाम को चंद्रदेव के उदित होने पर महिलाएं छलनी से दीपक की लौ की ओट में चंद्रमा के दर्शन करेंगी और जल का अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी आयु का आशीष मांगेंगी। इसके पश्चात पति के हाथों से जल ग्रहण कर 14 घंटे 57 मिनट लंबे इस निर्जला व्रत का पारण किया जाएगा।
विज्ञापन
ज्योतिषाचार्यों की गणना के मुताबिक, इस बार काशी में पिछले साल की तुलना में छह मिनट पहले ही चंद्रोदय हो जाएगा। पिछले वर्ष रात 8:03 बजे चंद्रमा के दर्शन हुए थे, जबकि इस बार शाम 7:57 बजे ही चंद्रदेव क्षितिज पर उदित हो जाएंगे। बीएचयू ज्योतिष विभाग के प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, मौसम में सक्रिय अर्नब चक्रवात का चंद्रोदय के निर्धारित समय पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और सभी व्रती महिलाएं समय पर अपना व्रत निर्विघ्न पूर्ण कर सकेंगी।
विज्ञापन
धार्मिक व ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार का करवा चौथ अत्यंत मंगलकारी संयोग लेकर आया है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि व्रत से एक दिन पूर्व 28 अक्तूबर को शाम 5:31 बजे भद्रा का आरंभ होगा, जो अगले दिन भोर में 4:27 बजे ही समाप्त हो जाएगा। इस प्रकार व्रत वाले दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। इसके अतिरिक्त, 28 अक्तूबर को प्रातः 7:35 बजे पूर्व दिशा में शुक्र का उदय हुआ है, जिसे सनातन परंपरा में अत्यंत फलदायी माना गया है। पर्व के दिन वरीयान योग, परिघ, पंच महापुरुष, बुधादित्य, पाराशरी राजयोग, मालव्य पंच, सरस्वती और अखंड सौभाग्य योग जैसे दुर्लभ शुभ योगों की शृंखला बन रही है।
विज्ञापन
16 शृंगार कर महिलाएं करेंगी शिव परिवार की पूजा
उत्तर भारत में करवा चौथ का विशेष सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। सुहागिनें सोलह शृंगार कर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और प्रथम पूज्य श्री गणेश की आराधना करेंगी। पूजा के लिए चौकी पर पीली मिट्टी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, धूप, दीप, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शर्करा) तथा गंगाजल से देव परिवार को भोग लगाया जाएगा। मिट्टी के टोंटीदार करवे, ढक्कन और लोटे से पूजन संपन्न होगा। हलवा, मिठाई और आठ पूड़ियों की अठावरी का नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। शाम को चंद्रदेव के उदित होने पर महिलाएं छलनी से दीपक की लौ की ओट में चंद्रमा के दर्शन करेंगी और जल का अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी आयु का आशीष मांगेंगी। इसके पश्चात पति के हाथों से जल ग्रहण कर 14 घंटे 57 मिनट लंबे इस निर्जला व्रत का पारण किया जाएगा।