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काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार, आज से कुंभाभिषेक का विशेष अनुष्ठान

Mon, 02 Jul 2018 11:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 02 Jul 2018 11:21 AM IST
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This is the very first time in history at kashi vishwanath temple Kumbhabhishekham
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अहिल्याबाई होल्कर द्वारा कराए जीर्णोद्धार के बाद के 240 साल के नव इतिहास में  पहली बार यहां बाबा का कुंभाभिषेक होगा। दो जुलाई से पांच जुलाई तक कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजेंद्र सरस्वती की देखरेख में दो सौ दक्षिण भारतीय ब्राह्मण यह अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। बाबा के मंदिर के स्वर्णशिखर से लेकर गर्भगृह तक कुंभाभिषेक होगा।  
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दक्षिण भारत में हर 12 वर्ष पर मंदिरों की सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता को बनाए रखने के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है। राज राजेश्वर स्वरूप में विराजित बाबा विश्वनाथ के मंदिर के कुं भाभिषेक का शुभारंभ दो जुलाई को गंगा तट से कलश यात्रा के साथ होगा। \
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यह कलश यात्रा मंदिर परिक्षेत्र से होते हुए बाबा के दरबार तक जाएगी। यहां पर गंगा के जल की 13 विधि से पूजा की जाएगी। दो सौ विद्वान ब्राह्मण मंत्रोच्चार एवं पूजन करेंगे। पांच जुलाई तक पूजन की प्रक्रिया निरंतर चलेगी।
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इसी दौरान पांच जुलाई की सुबह से गंगा जल से मंदिर के स्वर्ण शिखर से कुंभाभिषेक की प्रक्रिया शुरू होगी। दक्षिण भारत के यजमान सुबू सुंदरम कुंभाभिषेक का खर्च उठा रहे हैं।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत के मंदिरों में हर 12 वर्ष पर कुंभाभिषेक की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में यहां कुंभाभिषेक पहली बार होने जा रहा है। 

इस तरह आप भी हो सकते हैं शामिल

This is the very first time in history at kashi vishwanath temple Kumbhabhishekham
बाबा विश्वनाथ मंदिर के कुंभाभिषेक की प्रक्रिया का संकल्प दो जुलाई की शाम 6:30 बजे मंदिर परिसर में संपन्न होगा। मंदिर प्रशासन ने काशी की जनता से अपील की है कि जो भी व्यक्ति इस आयोजन में शामिल होना चाहता है वह निर्धारित समय पर होने वाले संकल्प में शामिल हो सकता है।

दक्षिण भारत के मंदिरों से ब्राह्मण भी काशी आ चुके हैं।  कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य विजेंद्र सरस्वती की देखरेख में होने वाले कुंभाभिषेक की प्रक्रिया के बाद मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा और बढ़ेगी।

जीर्णोद्धार से पहले गंगाजल को मंत्रोच्चार से पूजित कर पूरे मंदिर को शुद्ध किया जाता है। इस काम में 200 ब्राह्मण लगते हैं। कुंभाभिषेक की प्रक्रिया में आने वाले खर्च को दक्षिण भारत के भक्त वहन कर रहे हैं।
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