वाराणसी: बरेका के इंजनों की विदेशों में भी बड़ी मांग, 11 देशों में भेजे जा चुके हैं 171 रेल इंजन
बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में बनने वाले रेल इंजनों की विदेशों में मांग बढ़ रही है। अब तक बरेका द्वारा निर्मित 171 रेल इंजनों का प्रयोग 11 अन्य देश कर रहे हैं। इसमें तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, सूडान, सेनेगल, अंगोला, माली, मलेशिया और मोजांबिक शामिल हैं।
हाल में मोजांबिक की मांग पर 6 डीजल रेल (3100 एचपी, सीजी) इंजनों को भेजा गया है। इन इंजनों की सबसे बड़ी खासियत है कि इन में प्रयोग होने वाले 98 फीसदी सामान स्वदेशी हैं।
वर्तमान में सबसे ज्यादा लोकोमोटिव डब्ल्यूएपी-7 और लोकोमोटिव डब्ल्यूएजी-9 एच का निर्माण किया जा रहा है। लोकोमोटिव डब्ल्यूएपी-7 यात्री इंजन है। जो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की क्षमता वाला है।
लोकोमोटिव डब्ल्यूएजी-9 एच मालगाड़ी इंजन है। यह भी 6000 अश्वशक्ति का हेवी हॉल फ्रेट सर्विस इलेक्ट्रिक इंजन है, जो 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ता है। इसकी विदेशों में काफी डिमांड है।
तीन देशों ने किया संपर्क
6 अक्तूबर को एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के माध्यम से मलेशिया, तंजानिया और साउथ कोरिया ने बरेका से संपर्क किया। प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर राजेश कुमार राय ने बताया कि बरेका द्वारा निर्मित रेल इंजनों की डिमांड विदेशों में भी है। हाल में मोजांबिक को 6 इंजन भेजे गए थे।