{"_id":"576851f54f1c1bc119b47e0c","slug":"the-water-was-never-jagannath-vihar","type":"story","status":"publish","title_hn":"कभी भगवान जगन्नाथ यहां करते थे जल विहार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कभी भगवान जगन्नाथ यहां करते थे जल विहार
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 21 Jun 2016 01:58 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काशी में बैकुंठ भी है और सात पुरियां भीं। इन्हीं सप्तपुरियों में से एक जगन्नाथपुरी में चंदन कुंड श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। पुरी के चंदन कुंड में भगवान जगन्नाथ नौका विहार करते हैं। काशी में अक्षय तृतीया के दिन भगवान को कभी इसी कुंड में स्नान कराया जाता था। भक्त इस कुंड के जल से आचमन करने के बाद बाबा का दर्शन करते रहे हैं। इन दिनों गंदगी और कचरे से पटे इस कुंड के किनारे खड़ा होना भी मुश्किल है। भक्तों को अब इस कुंड के उद्धार की दरकार है।
अस्सी मुहल्ले में असि नदी किनारे स्थित जगन्नाथपुरी परिसर में चंदन कुंड के औषधीय गुणों से युक्त जल को पीकर कभी लोग निरोगी हो जाते थे। कुंड के जल का लोग पहले नियमित सेवन करते थे लेकिन अब इस कुंड में सड़न पैदा हो गई है। असि नदी के जल से ही यह कुंड रिचार्ज होता था और लबालब भरा रहता था। दंतकथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ जलाभिषेक से जब बीमार पड़ते थे, तो सुबह से शाम तक के जलाभिषेक का जल भी इसी कुंड में जाता था। अब ऐसा नहीं है।
कुंड में गंदगी होने की वजह से बाबा के जलाभिषेक का जल मंदिर परिसर के दूसरे हिस्से में बहा दिया जाता है। चंदन कुंड पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। पुरी में भी मंदिर परिसर में चंदन कुंड स्थित है। इस कुंड में अक्षय तृतीया के दिन भगवान कभी नौका विहार करते थे लेकिन अब तो उसमें से दुर्गंध उठने लगी है। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव दीपक शापुरी का कहना है कि चंदन कुंड का उद्धार जल्द ही कराया जाएगा।
विज्ञापन
रथयात्रा मेला के बाद इसी योजना तैयार कराई जाएगी। इस कुंड की महिमा को किसी भी दशा में घटने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रबंधन कटिबद्ध है। कुंड की ड्रेजिंग कराकर पानी बदला जाएगा, ताकि भक्त नए सिरे से इस कुंड के जल से आचमन कर सकें।
विज्ञापन
अस्सी मुहल्ले में असि नदी किनारे स्थित जगन्नाथपुरी परिसर में चंदन कुंड के औषधीय गुणों से युक्त जल को पीकर कभी लोग निरोगी हो जाते थे। कुंड के जल का लोग पहले नियमित सेवन करते थे लेकिन अब इस कुंड में सड़न पैदा हो गई है। असि नदी के जल से ही यह कुंड रिचार्ज होता था और लबालब भरा रहता था। दंतकथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ जलाभिषेक से जब बीमार पड़ते थे, तो सुबह से शाम तक के जलाभिषेक का जल भी इसी कुंड में जाता था। अब ऐसा नहीं है।
विज्ञापन
कुंड में गंदगी होने की वजह से बाबा के जलाभिषेक का जल मंदिर परिसर के दूसरे हिस्से में बहा दिया जाता है। चंदन कुंड पुरी के जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। पुरी में भी मंदिर परिसर में चंदन कुंड स्थित है। इस कुंड में अक्षय तृतीया के दिन भगवान कभी नौका विहार करते थे लेकिन अब तो उसमें से दुर्गंध उठने लगी है। ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव दीपक शापुरी का कहना है कि चंदन कुंड का उद्धार जल्द ही कराया जाएगा।
विज्ञापन
रथयात्रा मेला के बाद इसी योजना तैयार कराई जाएगी। इस कुंड की महिमा को किसी भी दशा में घटने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए मंदिर प्रबंधन कटिबद्ध है। कुंड की ड्रेजिंग कराकर पानी बदला जाएगा, ताकि भक्त नए सिरे से इस कुंड के जल से आचमन कर सकें।