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आजादी मिलने के बाद मंद पड़ गया भारतीयता का स्वर : डाॅ. राम सुधार

Fri, 19 Dec 2025 02:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Dec 2025 02:12 AM IST
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The voice of Indianness faded after independence: Dr. Ram Sudhar
बीएचयू के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र सभागार में बृहस्पतिवार को पं. विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में विद्वानों के बीच संवाद हुआ। साहित्यकार डाॅ. राम सुधार ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व भारतीयता का स्वर सबसे प्रबल था लेकिन आजादी मिलने के बाद भारतीयता का स्वर मंद पड़ने लगा था। लोहिया, पं विद्या निवास और शिव प्रसाद सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से जीवित रखा।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र, अंत: सांस्कृतिक केंद्र और विद्याश्री न्यास के इस संयुक्त कार्यक्रम में वक्ता डाॅ. राकेश मंजुल ने कहा कि सिनेमा विधा की अवधारणा में ही भारत बोध छिपा है। भारतीय लोक मानस में छाया प्रतुल की लोक प्रियता ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में ही सातवाहन साम्राज्य में मिलती है। आज भी आंध्र, कर्नाटक से लेकर इंडोनेशिया, कंबोडिया, मलेशिया, थाईलैंड और वर्मा में ये विधा लोकप्रिय है।
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