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12 साल के अनस गए सफर-ए-हज पर
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:22 AM IST
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अम्मी-अब्बू के साथ हज पर रवाना होता नाटी इमली का 12 वर्षीय मोहम्मद अनस जुनैद।
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अपने अम्मी-अब्बू के साथ नाटी इमली निवासी 12 साल के मोहम्मद अनस जुनैद गुरुवार को सफर-ए-हज पर रवाना हुए। उनकी खुशी का तो जैसे कोई ठिकाना नहीं था। अब्बू मोहम्मद रोशन व अम्मी नसीब बानो पहली बार हज पर जा रहे हैं। हैप्पी मॉडल स्कूल रामकटोरा में कक्षा आठ में पढ़ रहे अनस का कहना है कि काबा का दीदार करने की बड़ी तमन्ना थी।
इसलिए अम्मी अब्बू के साथ मैं भी हज पर जा रहा हूं। वहां मुल्क के लिए भी दुआ करूंगा। गुरुवार को पहले जत्थे में सबसे बुजुर्ग जाइरीन जौनपुर के 91 साल के मकबूल अहमद रहे। वह अपने बेटे रफी अहमद व बहू मेहरुन निसा के साथ सफर-ए-हज पर गए हैं।
वहीं आजमगढ़ के 23 वर्षीय के युवा अबू हुजैब अपना अहम फर्ज अदा करने अपनी दादी शाहजहां को लेकर गए। जामिया मीलिया इस्लामिया से बीए कर रहे अबू हुजैब का कहना है कि मैं खुशनसीब हूं कि दादी को हज कराने के बहाने ही मुझे भी हज का मौका मिला है। वहीं 30 साल के इलाहाबाद के इकराम अहमद अकेले हज पर गए हैं। बेटा छोटा है इसलिए अपनी बीवी को साथ नहीं ले जा पा सके। विधायक मुख्तार अंसारी की बहन फिरदौसिया सईद भी गुरुवार को हज पर रवाना हुईं। उनके साथ उनके शौहर सईद मुख्तार सिद्दीक मसऊद भी थे। गाजीपुर के रायगंज से उनका पूरा परिवार उन्हें विदा करने अस्थायी हज हाउस पहुंचा था। फिरदौसिया सईद ने कहा कि वह पहली बार हज पर जा रही हैं और इसकी खुशी वो बयां नहीं कर सकतीं।
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इसलिए अम्मी अब्बू के साथ मैं भी हज पर जा रहा हूं। वहां मुल्क के लिए भी दुआ करूंगा। गुरुवार को पहले जत्थे में सबसे बुजुर्ग जाइरीन जौनपुर के 91 साल के मकबूल अहमद रहे। वह अपने बेटे रफी अहमद व बहू मेहरुन निसा के साथ सफर-ए-हज पर गए हैं।
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वहीं आजमगढ़ के 23 वर्षीय के युवा अबू हुजैब अपना अहम फर्ज अदा करने अपनी दादी शाहजहां को लेकर गए। जामिया मीलिया इस्लामिया से बीए कर रहे अबू हुजैब का कहना है कि मैं खुशनसीब हूं कि दादी को हज कराने के बहाने ही मुझे भी हज का मौका मिला है। वहीं 30 साल के इलाहाबाद के इकराम अहमद अकेले हज पर गए हैं। बेटा छोटा है इसलिए अपनी बीवी को साथ नहीं ले जा पा सके। विधायक मुख्तार अंसारी की बहन फिरदौसिया सईद भी गुरुवार को हज पर रवाना हुईं। उनके साथ उनके शौहर सईद मुख्तार सिद्दीक मसऊद भी थे। गाजीपुर के रायगंज से उनका पूरा परिवार उन्हें विदा करने अस्थायी हज हाउस पहुंचा था। फिरदौसिया सईद ने कहा कि वह पहली बार हज पर जा रही हैं और इसकी खुशी वो बयां नहीं कर सकतीं।
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