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टीम ने पकड़ी गड़बड़ी, रोक के बावजूद कार्यदायी संस्था को भुगतान
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वाराणसी। करखियांव स्थित फल व सब्जी पैक हाउस के निर्माण में जांच टीम ने बड़ी गड़बड़ी पकड़ी है। निर्माण में लापरवाही के साथ ही भुगतान में भी अधिकारियों ने मनमानी की है। इसमें रोक के बावजूद कार्यदायी संस्था को 50 लाख से ज्यादा के भुगतान का मामला सामने आया है। जबकि काम पूरा होने तक किसी तरह के भुगतान पर रोक लगाई गई थी।
करखियाव में 15 करोड़ की लागत से बनने वाले वेयर हाउस निर्माण के लिए बुधवार को पहुंची नई दिल्ली से राइट्स अफसरों की टीम और प्रयागराज से तकनीकी टीम ने बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की है। इसमें समयसीमा के चार महीने बाद भी महज 30 फीसदी ही काम हो पाने को घोर लापरवाही मानी गई है। इसके अलावा एक सितंबर को हुए भुगतान को भी जांच के दायरे में रखा गया है। दरअसल, जांच टीम अब तक हुए भुगतान और काम का आंकलन कर रही है।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि 15 करोड़ की इस परियोजना में काम महज 30 फीसदी पूरा किया गया है, जबकि भुगतान 40 फीसदी के करीब कर दिया गया है। इस वित्तीय अनियमितता का मिलान कराया जा रहा है। यहां बता दें कि कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने मंडी परिषद में अनियमितता की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है। इसमें प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति व गुणवत्ता पर सवाल उठाया गया है। फलहाल टीम की रिपोर्ट के बाद लापरवाही अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।
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उधर, मंडी परिषद के निदेशक राजेश श्रीवास्तव इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। नई तैनाती का हवाला देते हुए इस प्रकरण में चुप्पी साध रखे हैं।
पैक हाउस के निर्माण कार्य में कोई अनियमितता नहीं बरती गई। बजट के अभाव में निर्माण कार्य पूरा नहीं होने में देरी हुई है। - वीके राय, पूर्व उप निदेशक, मंडी परिषद
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करखियाव में 15 करोड़ की लागत से बनने वाले वेयर हाउस निर्माण के लिए बुधवार को पहुंची नई दिल्ली से राइट्स अफसरों की टीम और प्रयागराज से तकनीकी टीम ने बिंदुवार रिपोर्ट तैयार की है। इसमें समयसीमा के चार महीने बाद भी महज 30 फीसदी ही काम हो पाने को घोर लापरवाही मानी गई है। इसके अलावा एक सितंबर को हुए भुगतान को भी जांच के दायरे में रखा गया है। दरअसल, जांच टीम अब तक हुए भुगतान और काम का आंकलन कर रही है।
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प्राथमिक जांच में पाया गया कि 15 करोड़ की इस परियोजना में काम महज 30 फीसदी पूरा किया गया है, जबकि भुगतान 40 फीसदी के करीब कर दिया गया है। इस वित्तीय अनियमितता का मिलान कराया जा रहा है। यहां बता दें कि कृषि निर्यात मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने मंडी परिषद में अनियमितता की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी है। इसमें प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति व गुणवत्ता पर सवाल उठाया गया है। फलहाल टीम की रिपोर्ट के बाद लापरवाही अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है।
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उधर, मंडी परिषद के निदेशक राजेश श्रीवास्तव इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। नई तैनाती का हवाला देते हुए इस प्रकरण में चुप्पी साध रखे हैं।
पैक हाउस के निर्माण कार्य में कोई अनियमितता नहीं बरती गई। बजट के अभाव में निर्माण कार्य पूरा नहीं होने में देरी हुई है। - वीके राय, पूर्व उप निदेशक, मंडी परिषद