रविदास जयंती 2022: वाराणसी के सीर में इमली का पेड़ बना रैदासियों की आस्था का केंद्र, बांधते हैं मन्नत का धागा
सीर में इमली का पेड़ बना संत रविदास का गांव सीर गोवर्धन रैदासियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। संत के मंदिर के साथ ही लगे इमली के पेड़ से रैदासियों की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
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संत रविदास का गांव सीर गोवर्धन रैदासियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। संत के मंदिर के साथ ही लगे इमली के पेड़ से रैदासियों की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। गुरु चरणों की रज पाने के लिए देश और विदेश से आने वाले रैदासी इमली के पेड़ में कलावा जरूर बांधते हैं और मन्नत भी मांगते हैं।
मान्यता है कि इसी इमली के पेड़ के नीचे बैठकर संत रविदास सत्संग किया करते थे। संत रविदास मंदिर के ट्रस्टी के एल सरोआ ने बताया कि संत हरिदास ने जब मंदिर की नींव रखी तब इमली का पेड़ सूखा हुआ था, लेकिन लगातार पानी देने से उसकी जड़ें फिर से हरी हो गईं।
आज यह पेड़ का रूप ले चुका है और रैदासियों के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ अवसर पर इमली के पेड़ पर मौली बांधने आते हैं। संत रविदास की जयंती पर सीर आने वाला हर श्रद्धालु संत रविदास के मंदिर में चरण रज पाने के बाद इमली के पेड़ की भी परिक्रमा करता है।
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खासकर महिलाएं इस पेड़ की फेरी लगाती हैं और मत्था टेककर अपने गुरु की श्रम साधना स्थली का आशीर्वाद लेकर जाती हैं। स्थानीय निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि इमली के पेड़ में लोगों की काफी आस्था है। यहां की मिट्टी को भी लोग पूजते हैं।
सेवादारों ने संभाली तैयारियों की कमान
संत रविदास की जयंती समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा के सेवादारों ने सेवा की कमान भी संभाल ली। जत्थे के पहुंचने के साथ ही संत रविदास मंदिर में सुबह और शाम की अमृतवाणी का पाठ भी आरंभ हो गया। मेले की रंगत 10 फरवरी से और भी चटख होने लगेगी। मेले की दुकानें भी सजने लगेंगी। ब्यूरो