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दो मिनट का योग, बीमारियों की छुट्टी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 26 Jun 2016 01:34 AM IST
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डॉ. शिल्पा देसाई
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देश की जानीमानी हेल्थ साइकोलॉजिस्ट डॉ. शिल्पा देसाई का दावा है कि मात्र दो मिनट की योग क्रियाओं से सिरदर्द, पेट दर्द जैसी दर्जन भर से अधिक बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। उन्होंने शारीरिक और मानसिक एकाग्रता के लिए योग और प्राणायाम को जरूरी बताया। कहा कि अच्छी सेहत के लिए जिम जाकर वर्जिश करने से बेहतर है कि रोजाना कम से कम दो से तीन मिनट तक योग आसन करें। योग से जहां मन को शांति मिलेगी वहीं प्राणायाम से फेफड़ों को मजबूती मिलेगी। सभी शैक्षणिक संस्थानों में योग और प्राणायाम का कैप्सूल कोर्स संचालित होना चाहिए।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में अमेरिकन एसोसिएशन आफ सॉकर की स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. शिल्पा ने अपने शोध के हवाले से बताया कि पांच साल से कम उम्र के 90 फीसद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। खान-पान को लेकर लापरवाही इसी मुख्य वजह है। बताया कि बच्चों में कफ कोल्ड, बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द जैसी शिकायतें आम होती जा रही हैं। इसके अलावा उनकी हड्डी और आंख भी कमजोर हो रही है। सरकार को इसकी जानकारी है। यही वजह है कि बच्चों को मानसिक तनाव से बचाने के परीक्षा के दबाव को लगातार कम करने की कोशिशें हो रही हैं।
डॉ. शिल्पा ने कहा कि बच्चों का दिमाग तो मजबूत हो रहा मगर फेफड़े कमजोर हो रहे हैं। दरअसल, खान-पान और दिनचर्या में असंतुलन से शरीर में आक्सीजन से कहीं ज्यादा कार्बन होने से वे बीमारी के शिकार हो रहे हैं। शरीर में रक्त की कमी एक बड़ी समस्या है। कहा कि इन सारी समस्याओं को बिना दवा के योग और प्राणायाम की मदद दूर करना संभव है।
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अस्पताल और डॉक्टर की क्लीनिक का चक्कर काटने से बचना है कि अपने खानपान और दिनचर्या में अनुशासन रखना ही होगा। कहा कि फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए सूर्य नमस्कार से उम्दा कोई तकनीक नहीं। मन और दिमाग को बदलना थोड़ा मुश्किल जरूर है मगर शरीर को बदलना उतना मुश्किल नहीं। शोध में सामने आया है कि 25 से 30 साल के युवा पांच घंटे काम करने में थक जा रहे हैं। काम करने की समयावधि लगातार घट रही है।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में अमेरिकन एसोसिएशन आफ सॉकर की स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. शिल्पा ने अपने शोध के हवाले से बताया कि पांच साल से कम उम्र के 90 फीसद बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। खान-पान को लेकर लापरवाही इसी मुख्य वजह है। बताया कि बच्चों में कफ कोल्ड, बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द जैसी शिकायतें आम होती जा रही हैं। इसके अलावा उनकी हड्डी और आंख भी कमजोर हो रही है। सरकार को इसकी जानकारी है। यही वजह है कि बच्चों को मानसिक तनाव से बचाने के परीक्षा के दबाव को लगातार कम करने की कोशिशें हो रही हैं।
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डॉ. शिल्पा ने कहा कि बच्चों का दिमाग तो मजबूत हो रहा मगर फेफड़े कमजोर हो रहे हैं। दरअसल, खान-पान और दिनचर्या में असंतुलन से शरीर में आक्सीजन से कहीं ज्यादा कार्बन होने से वे बीमारी के शिकार हो रहे हैं। शरीर में रक्त की कमी एक बड़ी समस्या है। कहा कि इन सारी समस्याओं को बिना दवा के योग और प्राणायाम की मदद दूर करना संभव है।
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अस्पताल और डॉक्टर की क्लीनिक का चक्कर काटने से बचना है कि अपने खानपान और दिनचर्या में अनुशासन रखना ही होगा। कहा कि फेफड़ों को मजबूत बनाने के लिए सूर्य नमस्कार से उम्दा कोई तकनीक नहीं। मन और दिमाग को बदलना थोड़ा मुश्किल जरूर है मगर शरीर को बदलना उतना मुश्किल नहीं। शोध में सामने आया है कि 25 से 30 साल के युवा पांच घंटे काम करने में थक जा रहे हैं। काम करने की समयावधि लगातार घट रही है।