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काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती का विवाद अब न्यास के गठन के बाद ही सुलझेगा

Wed, 13 May 2020 12:15 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Wed, 13 May 2020 12:15 AM IST
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The Saptarshi Aarti dispute in Kashi Vishwanath temple will now be resolved only after the formation of the trust
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती का विवाद मंदिर न्यास के गठन के बाद ही सुलझेगा। मंदिर प्रशासन न्यास की सहमति के बाद ही महंत परिवार से सप्तर्षि आरती कराने पर अंतिम निर्णय लेगा।  काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष का पद दिसंबर 2019 से रिक्त चल रहा है। सदस्यों का पद भी पहले से ही खाली होने से नई नियुक्ति होने तक न्यास अधिकारियों के ही जिम्मे है।

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प्रदेश सरकार ने 1983 में मंदिर का अधिग्रहण कर न्यास परिषद और कार्यपालक समिति का गठन किया था। तब से न्यास के अध्यक्ष और पांच सदस्य तीन-तीन साल के लिए नामित किए जाते हैं। कई विभागों के प्रमुख सचिव मानद सदस्य होते हैं। शृंगेरी के शंकराचार्य भी न्यास के मानद सदस्य हैं, लेकिन उनकी ओर से प्रतिनिधि भेजने की औपचारिता कई सालों से बंद है।
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आचार्य अशोक द्विवेदी का तीन साल का कार्यकाल दिसंबर में ही पूरा हो गया था। पांच सदस्यों का पद दो साल से रिक्त है। ऐसे में पदेन सदस्य के रूप में धमार्थ एवं संस्कृति विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव, कानून एवं विधि परामर्शी, कमिश्नर व अध्यक्ष मुख्य कार्यपालक समिति, मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ही न्यास में रह गए हैं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि न्यास की बैठक के बाद ही सप्तर्षि आरती के विवाद पर निर्णय लिया जाएगा।

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न्यास अध्यक्ष के लिए कई नाम हैं चर्चा में 

न्यास के अध्यक्ष के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इसमें निवर्तमान अध्यक्ष अशोक द्विवेदी से लेकर पद्मश्री डॉ. हरिहर कृपालु, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी, पं. दीपक मालवीय प्रमुख हैं। सभी की नजरें शासन के निर्णय पर हैं। अध्यक्ष के साथ शासन को पांच सदस्यों को भी नामित करना है। इनका कार्यकाल भी तीन साल का होगा।

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