{"_id":"6a0e06166fcc0a4b0f024b6a","slug":"the-sale-agreement-does-not-confer-ownership-rights-on-the-buyer-varanasi-news-c-20-vns1011-1399618-2026-05-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: बिक्री के समझौता विलेख से खरीदार को नहीं मिलता मालिकाना हक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: बिक्री के समझौता विलेख से खरीदार को नहीं मिलता मालिकाना हक
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संपत्ति की बिक्री का समझौता होने से खरीदार मालिकाना हक का हकदार नहीं होता है। समझौते का उल्लंघन अनुबंध टूटने का मामला बनता है, लेकिन इसे विश्वासघात नहीं कहा जा सकता।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने वाराणसी के रजनीश कुमार पटेल की प्रथम अपील खारिज कर दी। रजनीश ने वाराणसी के ग्राम पोंगलपुर (परगना देहात अमानत) में एक असीमांकित (बिना सीमा तय की गई) भूमि को खरीदने के लिए साल 2019 में प्रतिवादी उषा सिंह व अन्य के साथ 25 लाख रुपये में एक विक्रय समझौता किया था। इसमें से पांच लाख बयाना राशि के रूप में दिया गया था।
समझौते के मुताबिक विक्रेता को भूमि सीमांकन कराने के बाद रजिस्ट्री करनी थी। अपीलार्थी ने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद प्रतिवादियों ने भूमि के कुछ हिस्से तीसरे पक्ष को बेच दिए। इसके खिलाफ अपीलार्थी ने सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री रद्द कराने व निषेधाज्ञा की मांग के साथ वाद दाखिल किया था, जो खारिज हो गया। इस आदेश के खिलाफ अपीलार्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने भी सिविल कोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी। स्पष्ट किया कि समझौते में भूमि का कोई निश्चित हिस्सा या सीमांकन तय नहीं था, जिससे यह स्पष्ट नहीं था कि प्रतिवादियों ने वही हिस्सा बेचा है जिसका समझौता हुआ था। संवाद
विज्ञापन
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने वाराणसी के रजनीश कुमार पटेल की प्रथम अपील खारिज कर दी। रजनीश ने वाराणसी के ग्राम पोंगलपुर (परगना देहात अमानत) में एक असीमांकित (बिना सीमा तय की गई) भूमि को खरीदने के लिए साल 2019 में प्रतिवादी उषा सिंह व अन्य के साथ 25 लाख रुपये में एक विक्रय समझौता किया था। इसमें से पांच लाख बयाना राशि के रूप में दिया गया था।
विज्ञापन
समझौते के मुताबिक विक्रेता को भूमि सीमांकन कराने के बाद रजिस्ट्री करनी थी। अपीलार्थी ने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद प्रतिवादियों ने भूमि के कुछ हिस्से तीसरे पक्ष को बेच दिए। इसके खिलाफ अपीलार्थी ने सिविल कोर्ट में रजिस्ट्री रद्द कराने व निषेधाज्ञा की मांग के साथ वाद दाखिल किया था, जो खारिज हो गया। इस आदेश के खिलाफ अपीलार्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने भी सिविल कोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी। स्पष्ट किया कि समझौते में भूमि का कोई निश्चित हिस्सा या सीमांकन तय नहीं था, जिससे यह स्पष्ट नहीं था कि प्रतिवादियों ने वही हिस्सा बेचा है जिसका समझौता हुआ था। संवाद