{"_id":"669c316f73c3ebee3f0fccd4","slug":"the-roads-leading-to-the-pagodas-are-in-bad-condition-varanasi-news-c-295-1-mau1002-115378-2024-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: शिवालयों तक जाने वाली सड़कें बदहाल, कावड़ियों को होगी परेशानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: शिवालयों तक जाने वाली सड़कें बदहाल, कावड़ियों को होगी परेशानी
विज्ञापन
मऊ। सावन में अपनी मुरादें लेकर भगवान शिव के दरबार में जाने वाले शिवभक्तों को इस बार भी कंकड़ पत्थर और बदहाल रास्तों से होकर गुजरना होगा। इन्हीं रास्तों से कावड़िएं भी जल भरकर नंगे पांव मंदिरों में पहुंचेगे। कारण ये है कि कहीं पिच उखड़ गई है तो कहीं कीचड़ है।
जिले के कई शिवालयों को जाने वाले रास्ते बदहाल हैं। लेकिन जिम्मेदार इन रास्तों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं हैं। इस बार 22 जुलाई से सावन की शुरूआत हो रही है। भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों के जत्थे रवाना हो जाएंगे। जिले के प्रमुख दो शिव मंदिर तमसा नदी के किनारे स्थित कोपागंज ब्लॉक क्षेत्र का नौसेमर बारहदुअरिया शिव मंदिर और परदहां ब्लॉक के कहिनौर गांव में मां वनदेवी के पास स्थित शिव मंदिर जाने वाला रास्ता बदहाल है। नौसेमर के शिव मंदिर की बात की जाए तो सावन में हर सोमवार को वहां हजारों शिवभक्त भगवान का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन ये भक्त बड़ी मुश्किल से भगवान तक पहुंच पाते हैं। मंदिर तक जाने के लिए चारों दिशाओं से रास्ता है लेकिन एक भी रास्ता ठीक नहीं है। दो रास्ते पूराघाट की ओर से आते हैं इसमें से एक विद्युत उपकेंद्र कुर्थीजाफरपुर के पास से जाने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क बीते 10 साल से बदहाल है। बड़े बड़े गड्ढे हैं और गिट्टियां गई हैं जिससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं मंदिर तक पहुंचने के लिए बारिश में कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। दूसरा रास्ता पूराघाट पुल से होकर आता है जो नदी का बंधा है। बारिश के बाद इस रास्ते पर कीचड़ भर जाता है जिससे बाइक सवार गिरकर घायल हो जाते हैं। तीसरा रास्ता कोपागंज कस्बा की तरफ से जाता है लेकिन वो भी खराब है। गाजीपुर में गंगा किनारे स्थित मारकंडेय धाम से कांवड़ियों का जत्था पवित्र गंगाजल भरकर औड़िहार, सादात, जखनिया, दुल्लहपुर, पीपरीडीह रेलवे स्टेशन से होते हुए मां वनदेवी के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं।
लेकिन मौजूदा स्थिति में पिपरीडीह-बढुआगोदाम मार्ग काफी जर्जर है, जिसपर पैदल चलना मुश्किल है। इसी तरह मादि सिपाह स्थित मां कोइल मर्याद भवानी मंदिर में भव्य शिव मंदिर स्थित है। लेकिन श्रद्धालुओं के लिए वहां पहुंचना काफी कठिन साबित होता है। अतिक्रमण के चलते आज तक वहां सड़क नहीं बन पाई है। बरसात होने पर कीचड़ भरे रास्तों से शिवभक्तों को गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले के कई शिवालयों को जाने वाले रास्ते बदहाल हैं। लेकिन जिम्मेदार इन रास्तों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं हैं। इस बार 22 जुलाई से सावन की शुरूआत हो रही है। भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों के जत्थे रवाना हो जाएंगे। जिले के प्रमुख दो शिव मंदिर तमसा नदी के किनारे स्थित कोपागंज ब्लॉक क्षेत्र का नौसेमर बारहदुअरिया शिव मंदिर और परदहां ब्लॉक के कहिनौर गांव में मां वनदेवी के पास स्थित शिव मंदिर जाने वाला रास्ता बदहाल है। नौसेमर के शिव मंदिर की बात की जाए तो सावन में हर सोमवार को वहां हजारों शिवभक्त भगवान का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन ये भक्त बड़ी मुश्किल से भगवान तक पहुंच पाते हैं। मंदिर तक जाने के लिए चारों दिशाओं से रास्ता है लेकिन एक भी रास्ता ठीक नहीं है। दो रास्ते पूराघाट की ओर से आते हैं इसमें से एक विद्युत उपकेंद्र कुर्थीजाफरपुर के पास से जाने वाली करीब चार किलोमीटर सड़क बीते 10 साल से बदहाल है। बड़े बड़े गड्ढे हैं और गिट्टियां गई हैं जिससे पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं मंदिर तक पहुंचने के लिए बारिश में कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। दूसरा रास्ता पूराघाट पुल से होकर आता है जो नदी का बंधा है। बारिश के बाद इस रास्ते पर कीचड़ भर जाता है जिससे बाइक सवार गिरकर घायल हो जाते हैं। तीसरा रास्ता कोपागंज कस्बा की तरफ से जाता है लेकिन वो भी खराब है। गाजीपुर में गंगा किनारे स्थित मारकंडेय धाम से कांवड़ियों का जत्था पवित्र गंगाजल भरकर औड़िहार, सादात, जखनिया, दुल्लहपुर, पीपरीडीह रेलवे स्टेशन से होते हुए मां वनदेवी के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं।
विज्ञापन
लेकिन मौजूदा स्थिति में पिपरीडीह-बढुआगोदाम मार्ग काफी जर्जर है, जिसपर पैदल चलना मुश्किल है। इसी तरह मादि सिपाह स्थित मां कोइल मर्याद भवानी मंदिर में भव्य शिव मंदिर स्थित है। लेकिन श्रद्धालुओं के लिए वहां पहुंचना काफी कठिन साबित होता है। अतिक्रमण के चलते आज तक वहां सड़क नहीं बन पाई है। बरसात होने पर कीचड़ भरे रास्तों से शिवभक्तों को गुजरना पड़ता है।
विज्ञापन