फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   The Khuda Bakhsh Library is not merely a library but a vast repository of primary sources.

Varanasi News: खुदाबख्श लाइब्रेरी केवल पुस्तकालय नहीं, प्राथमिक स्रोतों का बड़ा भंडार

Wed, 26 Aug 2026 02:35 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 02:35 AM IST
विज्ञापन
The Khuda Bakhsh Library is not merely a library but a vast repository of primary sources.
पटना की खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी और कोलकाता के फोर्ट विलियम कॉलेज में पुस्तक संरक्षण की दुर्लभ परंपरा पर बीएचयू में व्याख्यान हुआ। भारत अध्ययन केंद्र में खुदाबख्श लाइब्रेरी के सदस्य डॉ. जाकिर हुसैन ने कहा कि खुदाबख्श लाइब्रेरी के संग्रह में बनारस के जमींदारों और क्षेत्रीय इतिहास से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इन स्रोतों के आधार पर इतिहासकारों ने बनारस और भारतीय इतिहास के कई पक्षों को स्पष्ट किया है। यह लाइब्रेरी इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए केवल पुस्तकालय नहीं, बल्कि प्राथमिक स्रोतों का बड़ा भंडार है।
विज्ञापन


डॉ. हुसैन ने बताया कि लाइब्रेरी के संस्थापक मौलवी मो. बख्श ने दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों का संग्रह शुरू किया, जिसे उनके पुत्र खुदाबख्श ने अपने जीवन का मिशन बनाया। फारसी, अरबी, उर्दू, संस्कृत, हिंदी, अवधी, तुर्की, पश्तो सहित कई भाषाओं की बहुमूल्य सामग्रियां एक ही स्थान पर संरक्षित हो पाईं। डॉ. हुसैन ने बताया कि संग्रह में मुगलकालीन मिनिएचर पेंटिंग्स के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कुछ पांडुलिपियों में चित्र बनाने, रंग भरने और खाका तैयार करने वाले कलाकारों के नाम तक दर्ज हैं। उन्होंने 1834 की एक पेंटिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजा रवि वर्मा के जन्म से भी पहले की है।
विज्ञापन


फारसी लिपि में लिखीं गीता की पांडुलिपियां
डॉ. हुसैन ने बताया कि लाइब्रेरी में भागबद्गीता की हिंदी भाषा और फारसी लिपि में लिखी दुर्लभ पांडुलिपियां भी उपलब्ध हैं। संस्कृत में भगवद्गीता, अवधी में रामायण, मलिक मोहम्मद जायसी की पद्मावत, राग-रागिनी, शाहनामा, विभिन्न मुगल, फारसी, तुर्की और मंगोल चित्रशैलियों से संबंधित पांडुलिपियां इसके संग्रह को विशिष्ट बनाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

फोर्ट विलियम भारतीय भाषाओं के इतिहास का प्रयोगशाला

बीएचयू में हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि फोर्ट विलियम कॉलेज को केवल अंग्रेजी शासन के दौर में भारतीय भाषाओं के अध्ययन और पुस्तक-निर्माण की संस्था के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। यह भारतीय भाषाओं के इतिहास, अनुवाद, ज्ञान-निर्माण और हिंदी-उर्दू-हिंदुस्तानी के संबंधों को समझने की प्रयोगशाला भी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed