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इटली के रिलीजन टुडे फिल्म फेस्टिवल में दिखेगी काशी के लाल की फिल्म
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 20 Aug 2018 05:04 PM IST
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फिल्म का एक सीन
- फोटो : अमर उजाला
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हंबल बुल क्रिएशन के बैनर तले बनी फिल्म ‘द होली फिश’ का चयन इटली में इसी साल अक्टूबर में होने वाले 21वें रिलीजन टुडे फिल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है।
फेस्टिवल में धर्म और वर्तमान समाज पर परस्पर असर को दिखाने वाली फिल्मों को ही चुना जाता है। फीचर फिल्म की श्रेणी में ‘द होली फिश’ भारत से एकमात्र फिल्म के रूप में चुनी गई है।
इस श्रेणी में इटली, अमेरिका, बांग्लादेश, कनाडा, रूस, टर्की, कोरिया, बेल्जियम और इजराइल की फिल्में शामिल हैं। इसके पहले ‘द होली फिश’ 23वें कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के कंपटीटिव सेक्शन में शामिल थी।
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फिल्म के लेखक एवं निर्देशक विमल चन्द्र पांडेय और संदीप मिश्रा हैं। बलिया के रहने वाले विमल चंद्र पांडेय अब बनारस के लहरतारा में ही रहते हैं। शिक्षा-दीक्षा और जन्म काशी में ही हुआ है। छह साल पहले मुंबई गए और फिल्मों के लेखन व निर्देशन में सफलता पूर्वक हाथ आजमाया।
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फेस्टिवल में धर्म और वर्तमान समाज पर परस्पर असर को दिखाने वाली फिल्मों को ही चुना जाता है। फीचर फिल्म की श्रेणी में ‘द होली फिश’ भारत से एकमात्र फिल्म के रूप में चुनी गई है।
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इस श्रेणी में इटली, अमेरिका, बांग्लादेश, कनाडा, रूस, टर्की, कोरिया, बेल्जियम और इजराइल की फिल्में शामिल हैं। इसके पहले ‘द होली फिश’ 23वें कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के कंपटीटिव सेक्शन में शामिल थी।
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फिल्म के लेखक एवं निर्देशक विमल चन्द्र पांडेय और संदीप मिश्रा हैं। बलिया के रहने वाले विमल चंद्र पांडेय अब बनारस के लहरतारा में ही रहते हैं। शिक्षा-दीक्षा और जन्म काशी में ही हुआ है। छह साल पहले मुंबई गए और फिल्मों के लेखन व निर्देशन में सफलता पूर्वक हाथ आजमाया।
इस उपलब्धि से फिल्म के रिलीज करना आसान होगा
लेखक एवं निर्देशक विमल चन्द्र पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
विमल ने बताया कि फिल्म के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचने की बेहद खुशी है। उम्मीद है कि इस उपलब्धि से फिल्म के आगे का रास्ता यानि इसके रिलीज की प्रकिया थोड़ी आसान होगी।
बहरहाल, फिल्म की कहानी एक बूढ़े किरदार और एक नवविवाहित युवती के इर्द-गिर्द घूमती है जो इलाहाबाद में संगम के किनारे कुंभ की धरती पर लगने वाले विशाल मेले में अपनी अपनी इच्छाओं का पीछा करते हुए पहुंचते हैं। फिल्म की शूटिंग इलाहाबाद के माघ मेले और मानिकपुर के गांवों में हुई है और इसमें मुंबई व इलाहाबाद के कलाकारों ने अभिनय किया है।
बूढ़े की केन्द्रीय भूमिका में इलाहाबाद के वरिष्ठ रंगकर्मी सैयद इकबाल अहमद और नवविवाहित लड़की के किरदार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक सुमन पटेल ने निभाया है। फिल्म में अनारकली ऑफ आरा और बुद्धा इन ट्रैफिक जाम जैसी फिल्मों को अपने संगीत से सजा चुके रोहित शर्मा ने संगीत दिया है।
बहरहाल, फिल्म की कहानी एक बूढ़े किरदार और एक नवविवाहित युवती के इर्द-गिर्द घूमती है जो इलाहाबाद में संगम के किनारे कुंभ की धरती पर लगने वाले विशाल मेले में अपनी अपनी इच्छाओं का पीछा करते हुए पहुंचते हैं। फिल्म की शूटिंग इलाहाबाद के माघ मेले और मानिकपुर के गांवों में हुई है और इसमें मुंबई व इलाहाबाद के कलाकारों ने अभिनय किया है।
बूढ़े की केन्द्रीय भूमिका में इलाहाबाद के वरिष्ठ रंगकर्मी सैयद इकबाल अहमद और नवविवाहित लड़की के किरदार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्नातक सुमन पटेल ने निभाया है। फिल्म में अनारकली ऑफ आरा और बुद्धा इन ट्रैफिक जाम जैसी फिल्मों को अपने संगीत से सजा चुके रोहित शर्मा ने संगीत दिया है।