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अग्निपथ योजना से सरकार ने युवाओं को दिया बड़ा अवसर
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लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी ने कहा कि सरकार ने अग्निपथ योजना के माध्यम से युवाओं को एक बहुत बड़ा अवसर दिया है। यह केवल देश की सेना में फौजी बनकर ही नहीं अपितु समाज में भी एक सम्मानित नागरिक का जीवन जी सकेंगे। चार साल तक सेना के साथ काम करने वाला स्वयं में एक अनुशासित युवा होगा और उसकी ट्रेनिंग और अनुशासन उसे कारपोरेट जगत में सम्मानित स्थान दिलाएगा।
शुक्रवार को बीएचयू के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के कामधेनु सभागार में आयोजित व्याख्यान के दौरान ले. जनरल संजय कुलकर्णी ने कहा कि भारत के लिए सियाचिन एकमात्र ऐसा स्थान है जहां से भारतीय सेना चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आदि पर नजर रखती है। 21000 फुट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन का तापमान माइनस 50 डिग्री तथा हवाएं 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। परंतु फिर भी भारतीय सेना का जवान इस बात पर गर्व करता है कि उसने भी सियाचिन में ड्यूटी निभाई है। वर्ष 1984 में ऑपरेशन मेघदूत में भारत के हाथों से पाकिस्तानी सेना की शिकस्त के बाद जनरल मुशर्रफ काफी गुस्से में थे और उसी का बदला लेने की चाह से उन्होंने कारगिल का युद्ध किया और यहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आने वाले समय में अब युद्ध परंपरागत तरीके से नहीं होंगे इसलिए हमें भी अपनी सेना का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है। साइबर अटैक और ड्रोन टेक्नोलॉजी का भरपूर प्रयोग हो रहा है। अत: अब हमें तत्काल निर्णय लेने वाले मुखिया की आवश्यकता है। इस दौरान मयंक नारायण सिंह, प्रो. एमके सिंह, खुशबू मिश्रा, मोनालिसा हाजरा आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को बीएचयू के दुग्ध विज्ञान एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विभाग के कामधेनु सभागार में आयोजित व्याख्यान के दौरान ले. जनरल संजय कुलकर्णी ने कहा कि भारत के लिए सियाचिन एकमात्र ऐसा स्थान है जहां से भारतीय सेना चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान आदि पर नजर रखती है। 21000 फुट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन का तापमान माइनस 50 डिग्री तथा हवाएं 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं। परंतु फिर भी भारतीय सेना का जवान इस बात पर गर्व करता है कि उसने भी सियाचिन में ड्यूटी निभाई है। वर्ष 1984 में ऑपरेशन मेघदूत में भारत के हाथों से पाकिस्तानी सेना की शिकस्त के बाद जनरल मुशर्रफ काफी गुस्से में थे और उसी का बदला लेने की चाह से उन्होंने कारगिल का युद्ध किया और यहां भी उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आने वाले समय में अब युद्ध परंपरागत तरीके से नहीं होंगे इसलिए हमें भी अपनी सेना का आधुनिकीकरण करना आवश्यक है। साइबर अटैक और ड्रोन टेक्नोलॉजी का भरपूर प्रयोग हो रहा है। अत: अब हमें तत्काल निर्णय लेने वाले मुखिया की आवश्यकता है। इस दौरान मयंक नारायण सिंह, प्रो. एमके सिंह, खुशबू मिश्रा, मोनालिसा हाजरा आदि मौजूद रहे।
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