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Varanasi News: खतरे के निशान से सिर्फ 0.58 मीटर नीचे रह गईं गंगा
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चौबेपुर पिपरी गांव में चतुर्दिक पानी से घिरा गांव के राजभर बस्ती का पलायन शुरू बाढ़ के पानी से
- फोटो : जीआईसी में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत शुरू हुई कक्षा में पढ़ातीं जिला युवा अधिकारी वर्तिका सिंह।
- जलस्तर बढ़ने से पानी का पलटवार, शहर में भी लग रहा पानी
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा का जलस्तर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा खतरे के निशान को छूने को आतुर हैं। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ कर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर खतरे के निशान से महज 0.58 मीटर ही नीचे है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जलस्तर में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है।
गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। अब तक 566 परिवारों और 1381 लोग अपने घरों को छोड़ शेल्टर होम में शिफ्ट हो गए हैं। इनके अलावा 3843 लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकान में शिफ्ट हैं। बाढ़ के कारण शवों को मणिकर्णिका घाट तक लाना भी दुश्वार हो गया है। शमशान तक पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के चलते शवों के आने का सिलसिला भी कम हुआ है, लेकिन जो शवयात्री आ रहे हैं, उन्हें गंदगी, कीचड़, मलबे और कंधे तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हो रहा है।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। गंगा का जलस्तर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा खतरे के निशान को छूने को आतुर हैं। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ कर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर खतरे के निशान से महज 0.58 मीटर ही नीचे है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जलस्तर में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है।
गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। अब तक 566 परिवारों और 1381 लोग अपने घरों को छोड़ शेल्टर होम में शिफ्ट हो गए हैं। इनके अलावा 3843 लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकान में शिफ्ट हैं। बाढ़ के कारण शवों को मणिकर्णिका घाट तक लाना भी दुश्वार हो गया है। शमशान तक पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ के चलते शवों के आने का सिलसिला भी कम हुआ है, लेकिन जो शवयात्री आ रहे हैं, उन्हें गंदगी, कीचड़, मलबे और कंधे तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हो रहा है।
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