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भूटान राजघराने का बच्चा है धर्मगुरु वेरोचना का अवतार!

Fri, 06 Jan 2017 09:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 06 Jan 2017 09:05 PM IST
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the child of Bhutan royalty is  personification of religious Verocna!
जिगमी जिगतेन वांग्चुक - फोटो : अमर उजाला
भूटान की राजमाता आशी दोरजी व्योमे वांग्चुक ने सारनाथ में दर्शन पूजन किया। विश्व शांति की कामना की।
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राजमाता के साथ उनकी बेटी और नाती ने भी दर्शन पूजन किया।
गया स्थित तिब्बत मंदिर के प्रभारी भिक्षु लामा ईशे बौद्ध (तिब्बत निवासी) ने दावा किया है कि भूटान की राजमाता की बेटी सोनम देछेन वांग्चुक के चार साल के बेटे जिगमी जिगतेन वांग्चुक तिब्बत में धर्मगुरु वेरोचना के अवतार हैं।
उन्होंने बताया कि पुनर्जन्म की सारी बातें जिगमी जिगतेन वांग्चुक को याद हैं।

धर्मगुरु के बारे में भिक्षु लामा ईशे बौद्ध ने बताया कि 824 साल पहले तिब्बत में वेरोचना लोचावा रिंग पोंछे का जन्म हुए थे।
नालंदा में उन्होंने पढ़ाई की और बाद में धर्मगुरु हो गए। उन्होंने भगवान बुद्ध के उपदेशों का प्रचार प्रसार किया और कई क्षेत्रों का भ्रमण किया।

भिक्षु लामा ईशे बौद्ध  ने  बताया कि जिगमी जिगतेन को सब कुछ स्मरण है।
चौखंडी स्तूप में भी जिगमे ने बिछी चमकीली चादर पर परंपरागत तरीके से पूजा की। मंदिर आने से पूर्व भूटान की राजमाता ने कहा था कि वह अपने नाती के कहने पर ही सारनाथ दर्शन करने आई हैं। 
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भूटान की राजमाता ने की विश्व शांति की कामना

the child of Bhutan royalty is  personification of religious Verocna!
सारनाथ में दर्शन पूजन किया - फोटो : अमर उजाला
भूटान की राजमाता आशी दोरजी व्योमे वांग्चुक ने शुक्रवार को सारनाथ में दर्शन पूजन किया। विश्व शांति की कामना की। शाम गंगा आरती में शामिल हुईं। इस दौरान उनके परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे। 
राजमाता गुरुवार शाम वाराणसी पहुंचीं। होटल दि गेट वे से सुबह सारनाथ पहुंचीं। सबसे पहले खंडहर परिसर की ओर गईं।
धमेख स्तूप की परिक्रमा कर विश्व शांति के लिए पूजा पाठ कीं। इसके बाद मूल गंध कुटी विहार गईं।

मंदिर में महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के सहायक सचिव भिक्षु मेधांकर ने पूजा पाठ कराया। इसके बाद राजमाता परिवार के साथ बोधि वृक्ष के दर्शन-पूजन करने पहुंचीं।
वहां उन्हें पवित्र वृक्ष के करीब तक जाने दिया गया। विधिविधान से पूजा-पाठ कर खाता अर्पण किया। बोधि वृक्ष का पत्ता भी लिया। इसके बाद चौखंडी स्तूप पहुंचीं, जहां भिक्षुआें ने पूजन कराया और खाता अर्पण कराया। उ
नके पोते जिगमी जिगतेन वांग्चुक और जिगमे वांग्चुक भी पूजा में शामिल हुए। भारतीय व्यंजनों का लुत्फ भी उठाया। वह शनिवार की सुबह हैदाराबाद के लिए रवाना हो जाएंगी।
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