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शासन के पाले में गेंद डालकर सो जाते हैं अफसर

Wed, 23 Nov 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 23 Nov 2016 02:14 AM IST
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The case of demolition hangs from eight months, Jhujhunwala, jalan, varanasi
ढहाने का मामला आठ महीने से लटका
सरकारी मशीनरी ऐसे ही चलती है। गरीब आदमी कोई गलत काम करे तो तत्काल कार्रवाई कर अपनी पीठ ठोक लेते हैं अफसर। लेकिन उससे कई गुना अधिक गुनाह कोई रसूखदार करे तो उसके मामले को दबाने-टालने की भरसक कोशिश जारी रहती है। कोई जोर नहीं चलता तो गेंद शासन के पाले में डाल दी जाती है और फिर महीनों-सालों तक चलता रहता है फाइल-फाइल का खेल। दो मामले सामने हैं। जालांस के स्टोर से बिकने वाली हल्दी की जांच के बाद स्पष्ट हो गया कि यह स्वास्थ्य के लिए घातक है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब शासन की स्वीकृति मिलने के बाद अदालत में मुकदमा दर्ज होगा। कब होगा, कुछ पता नहीं। दूसरा मामला है झुनझुनवाला ऑयल मिल में किए गए अवैध निर्माण को ढहाने की लेकर की जा रही हीलाहवाली का। निर्देश के आठ महीने बाद भी इसे ढहाया नहीं गया।
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जालांस पर केस दर्ज करने की संस्तुति, रिपोर्ट शासन को
दुर्गाकुंड स्थित जालांस सुपर मार्केट में मिलावटी एवं स्वास्थ्य के लिए घातक हल्दी बिकने के मामले में जालांस सुपर मार्केट प्रबंधन के खिलाफ जल्दी ही मुकदमा दर्ज होगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद अदालत में मुकदमा दर्ज होगा। मामले में छह माह से तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने पिछले दिसंबर महीने में जालांस सुपर मार्केट से हल्दी, काजू, उड़द की दाल और सौंफ सैंपलिंग के लिए ली थी। इसे जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया था। जांच में काजू, उड़द की दाल और सौंफ अन सब स्टैंडर्ड तो हल्दी अनसेफ पाई गई। हल्दी के अनसेफ मिलने के मामले में जालांस सुपर मार्केट ने हल्दी के सैंपल को गाजियाबाद लैब से जांच कराने की अपील की थी। इसकी जांच रिपोर्ट पिछले सप्ताह आई। रिपोर्ट में हल्दी को स्वास्थ्य के लिए घातक बताया गया है। ऐसे मामलों में विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अभिहित अधिकारी हरिश्ंाकर सिंह का कहना है कि जालांस सुपर मार्केट में बिकने वाली हल्दी की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। अनुमति मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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ध्वस्तीकरण का मामला आठ महीने से लटका
वीडीए की सुस्त चाल और लापरवाही के चलते शहर में पहले गुपचुप तरीके से निर्माण को अनुमति देना और अवैध निर्माण को ढहाने का खेल खूब फल-फूल रहा है। सारनाथ के तिलमापुर स्थित झुनझुनवाला ऑयल मिल में किए गए जिस अवैध निर्माण को मार्च, 2016 में ढहाने का आदेश दिया था उसे वीडीए के अफसरों की लापरवाही से अब तक ढहाया नहीं जा सका और मामला शासन तक पहुंच गया। वीडीए की यह सुस्त चाल नमूनाभर है। शहर में ऐसे कई भवन और मल्टीस्टोरी हैं, जो अवैध ढंग से बनाई गई हैं। जानकारी होने पर वीडीए के अधिकारी नोटिस जारी करते हैं। फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। भवन स्वामी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिल जाता है। चूंकि मामला एक उद्योगपति का है तो इसमें शासन से लेकर वीडीए के और प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
अवर अभियंता की ओर से प्राधिकरण को 22 मार्च, 2016 को आख्या दी गई कि झुनझुनवाला ऑयल मिल ने प्रथम तल एवं द्वितीय तल पर 9.80 गुणे 39.00 मीटर के माप में (कुल क्षेत्रफल 764.40 वर्ग मीटर) अवैध निर्माण कराया गया है। निर्माण के लिए भू स्वामी ने अनुमति नहीं ली थी। प्रश्नगत निर्माण महायोजना की 45.00 मीटर चौड़ी सड़क से प्रभावित होने एवं सेट बैक के नियमों से प्रभावित निर्माण शमनीय नहीं है।

आख्या पर वीडीए के जोनल अधिकारी ने ध्वस्तीकरण आदेश दिया। आदेश के बाद भी वीडीए ने तत्काल कार्रवाई नहीं की और मामला इसी साल अप्रैल में कमिश्नर के यहां चला गया। वहां ध्वस्तीकरण के आदेश को यथावत रखा गया। तब भी वीडीए ने अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया। इस बीच ऑयल मिल संचालक ने 23 मई को शासन में पुनरीक्षण याचिका दायर कर दी। तब से मामला लटका हुआ है। तिलमापुर के पूर्व ग्राम प्रधान नागेश्वर     मिश्रा ने पहली बार 2013 में झुनझुनवाला ऑयल मिल में अवैध निर्माण की शिकायत वीडीए से की थी। शिकायत का संज्ञान लेकर वीडीए ने ऑयल मिल को नोटिस जारी की लेकिन मिल प्रबंधन की ओर नोटिस का जवाब नहीं दिया गया था। अब       शिकायतकर्ता स्टे के खिलाफ शासन में शिकायत की है। उनका कहना है कि वीडीए ने जब अपने आदेश में लिखा था कि प्रकरण शमनीय नहीं है तो फिर किस आधार पर स्थगन दिया गया है।

 
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