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पुलिस की निगरानी में ऊंट की कुर्बानी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 27 Sep 2015 02:32 AM IST
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मदनपुरा सहित शहर में तीन स्थानों पर बकरीद के दूसरे दिन शनिवार को ऊंट की कुर्बानी दी गई। काशी में ऊंट की कुर्बानी की यह रवायत काफ ी पुरानी है। ईद-उल-अजहा के मुकद्दस मौके पर हजारों लोगों की मौजूदगी में ऊंट की कुर्बानी दी गई। इस दौरान खास इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। रविवार को धन्नीपुरा और सलेमपुरा में ऊंट की कुर्बानी होगी।
मदनपुरा स्थित पंजफेड़वा के अलावा मौलाना हारून रशीद नक्शेबंदी की सदारत में आदमपुर के सलेमपुरा और जलालुद्दीनपुरा में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच ऊंट की कुर्बानी हुई। यह कुर्बानी सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच हुई। कुर्बानी का तबर्रुक लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आए। अरब के देशों में भी काशी की तरह ऊंट की कुर्बानी देने की परंपरा है। मुस्लिम धर्मगुरुओं के मुताबिक एक दिन हजरत इब्राहिम ने सपना देखा। सपने में अल्लाह ने उनसे अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए कहा। ऐसे में
वह इसे हकीकत का रूप देने निकल पड़े। रास्ते में उन्हें तीन शैतान मिले, जो कुर्बानी में रुकावट डालना चाहते थे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं, सच्ची इबादत से बला टल गई। अल्लाह ने उनके बेटे को बचा लिया और बेटे के बदले बकरे की कुर्बानी हो गई। तब से यह रवायत बरकरार है। सैयद फरमान हैदर के मुताबिक कुर्बानी का मकसद इंसान के अंदर के बुरे खयालों को खत्म करना है। ऐसा करने पर वह नेक रास्ते पर चलने लगता है। यह कुर्बानी मुसीबतों से इंसान को बचाती है।
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मदनपुरा स्थित पंजफेड़वा के अलावा मौलाना हारून रशीद नक्शेबंदी की सदारत में आदमपुर के सलेमपुरा और जलालुद्दीनपुरा में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच ऊंट की कुर्बानी हुई। यह कुर्बानी सुबह साढ़े पांच से साढ़े छह बजे के बीच हुई। कुर्बानी का तबर्रुक लेने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आए। अरब के देशों में भी काशी की तरह ऊंट की कुर्बानी देने की परंपरा है। मुस्लिम धर्मगुरुओं के मुताबिक एक दिन हजरत इब्राहिम ने सपना देखा। सपने में अल्लाह ने उनसे अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए कहा। ऐसे में
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वह इसे हकीकत का रूप देने निकल पड़े। रास्ते में उन्हें तीन शैतान मिले, जो कुर्बानी में रुकावट डालना चाहते थे। हालांकि ऐसा हुआ नहीं, सच्ची इबादत से बला टल गई। अल्लाह ने उनके बेटे को बचा लिया और बेटे के बदले बकरे की कुर्बानी हो गई। तब से यह रवायत बरकरार है। सैयद फरमान हैदर के मुताबिक कुर्बानी का मकसद इंसान के अंदर के बुरे खयालों को खत्म करना है। ऐसा करने पर वह नेक रास्ते पर चलने लगता है। यह कुर्बानी मुसीबतों से इंसान को बचाती है।
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