फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   The Banaras Gharana is the tripartite of singing, playing and dancing.

गायन, वादन और नृत्य की त्रिपथगा है बनारस घराना

Tue, 21 Jun 2022 12:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jun 2022 12:15 AM IST
विज्ञापन
The Banaras Gharana is the tripartite of singing, playing and dancing.
मिलता है निगाहों को सुकूं हृदय को आराम, क्या प्रेम है क्या प्यार बनारस की गली में... जी हां गलियों के शहर बनारस की हर बात निराली है। सुर, साज और राग के आराध्य आदियोगी शिव की नगरी में संगीत के सुर भी अनोखे हैं। काशी की गलियों से निकलकर सात समंदर पार तक हर संगीत का रसिक इस रस में सराबोर हो चुका है। भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई हो या फिर पं. रविशंकर का सितार या कथक साम्राज्ञी सितारा देवी का जादू हर किसी के सिर चढ़कर बोला। गंगा के पानी और बनारस की माटी ने संगीत को कुछ ऐसा गढ़ा कि इसका असर ताजिंदगी जवां ही रहता है।
विज्ञापन

विश्व संगीत दिवस पर बनारस घराने की शताब्दी यात्रा की चर्चा करते हुए पद्मविभूषण पं. छन्नू लाल मिश्र का कहना है कि बनारस घराना कबीरचौरा से रामापुरा की गलियों में बसने वाला वह रस है जो शताब्दियों से अनवरत प्रवाहमान है। सिर्फ बनारस ही नहीं दुनिया भी बनारस घराने का नाम बड़े अदब से लेती है। सुर-संगीत की राग-रागिनियां बनारस घराने से जुड़े हर कलाकार में बहती हैं। इस घराने के गायक ध्रुपद, धमार, ख्याल, ठुमरी और टप्पा में महारत हासिल रखते हैं। वादन में तबला, सितार, सरोद और सारंगी के साथ ही नृत्य की शैली को भी समेटे हुए हैं।
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य ने बताया कि बनारस घराना गायन, वादन और नृत्य की त्रिपथगा है। पं. रामसहाय के प्रयास और तपस्या का परिणाम है कि आज दुनिया में बनारस घराना अपना एक अलग ही स्थान रखता है। तबला वादन की विशिष्ट शैली बनारस बाज पं. रामसहाय की साधना का ही परिणाम है। पद्मश्री डॉ. सोमा घोष कहती हैं कि शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई के सुरों में तो गंगा की रवानी ही बहती थी। आज भी शहनाई उस्ताद के नाम से ही जानी जाती है। इसके अलावा बनारस की पद्मगली से निकले पद्मविभूषण पं. किशन महाराज, पद्मभूषण पं. सामता प्रसाद मिश्र, पद्मभूषण पं. राजन-साजन मिश्र ने बनारस घराने में चार चांद लगाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जारी है पं. रविशंकर की परंपरा
भारतरत्न पं. रविशंकर ने काशी की गलियों से निकलकर विश्व के फलक पर बनारस घराने के संगीत को पहुंचाया था, वह परंपरा आज भी जारी है। ख्यात सरोद वादक पं. विकास महाराज यूरोपीय देशों में आज भी बनारसी संगीत का जादू बिखेर रहे हैं। उनके साथ उनके पुत्र तबला वादक प्रभाष महाराज, सरोद वादक विशाल महाराज और सितारवादक अभिषेक महाराज की जोड़ी बनारस घराने का नाम रोशन कर रही है। वहीं पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र के पुत्र युवा सितारवादक पं. देवब्रत मिश्र बनारस से सात समंदर पार का रिश्ता मजबूत कर रहे हैं।

दुनिया के अनोखे वाद्ययंत्रों का संग्रह है वाद्य संग्रहालय में
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मच कला संकाय में पं. लालमणि मिश्र वाद्य संग्रहालय दुनिया भर के वाद्ययंत्रों का अनोखा म्यूजियम हैं। एक तरफ जहां दुनिया का सबसे बड़ा तानपूरा है तो वहीं मंजीरा, सारंगी, झांझ और जलतरंग के अनोखे स्वरूप भी यहां नजर आते हैं। प्रो. ज्ञानेश पांडेय बताते हैं कि तानपूरे की लंबाई आठ फीट और इसका व्यास चार फीट है। पीतल की धातु से निर्मित तानपूरे की चाभी भी पीतल की है। इसके अलावा संग्रहालय में 150 से ज्यादा वाद्ययंत्रों को संजो कर रखा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed