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अस्थायी आश्रय गृहों में बदइंतजामी का वास
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शहर में लोगों को ठंड से बचाने के लिए नगर निगम की ओर से अस्थायी और स्थायी आश्रय गृह (शेल्टर होम) बनाए गए हैं। इसमें स्थायी आश्रय गृह की स्थिति तो थोड़ी ठीक है, लेकिन अस्थायी आश्रय गृहों में असुविधाओं का वास है। बढ़ती ठंड के बाद भी इन आश्रय गृह में लोगों के रुकने की इंतजाम के नाम पर खानापूर्ति की गई है। सोमवार को दोपहर में अस्थायी आश्रय गृह में कर्मचारी नहीं दिखे। इस वजह से यहां कोई यात्री आश्रय लेने भी नहीं आ रहे।
शहर में कुल 14 स्थायी शेल्टर होम और चार अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं। कैंट रोडवेज के सामने चौकाघाट फ्लाईओवर के नीचे दो अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं। टीन शेड और तिरपाल से बने इस आश्रय गृह में फोल्डिंग बेड, कंबल तो उपलब्ध हैं पर देखरेख के आभाव में जहां-तहां बिखरे हैं। इसके चारों ओर गंदगी फैली है। सोमवार को दोपहर में कर्मचारी न होने के कारण अंदर कुत्ते घूमते दिखे और प्रवेश द्वार पर कूड़े का ढेर लगा दिखा।
आधार से नाम पता लेकर ही रुकने दे रहे यात्री
कैंट के जवाहर मार्केट में स्थित स्थाई आश्रय गृह में व्यवस्थाएं ठीक होने के साथ ही साफ-सफाई भी दिखी। यहां ठंड से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। आश्रय गृह के कर्मचारी अशोक कुमार ने बताया कि यहां रुकने के लिए आने वाले यात्रियों का आधार कार्ड, नाम पता देखने के बाद ही रुकने दिया जाता है।
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शहर में कुल 14 स्थायी शेल्टर होम और चार अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं। कैंट रोडवेज के सामने चौकाघाट फ्लाईओवर के नीचे दो अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं। टीन शेड और तिरपाल से बने इस आश्रय गृह में फोल्डिंग बेड, कंबल तो उपलब्ध हैं पर देखरेख के आभाव में जहां-तहां बिखरे हैं। इसके चारों ओर गंदगी फैली है। सोमवार को दोपहर में कर्मचारी न होने के कारण अंदर कुत्ते घूमते दिखे और प्रवेश द्वार पर कूड़े का ढेर लगा दिखा।
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आधार से नाम पता लेकर ही रुकने दे रहे यात्री
कैंट के जवाहर मार्केट में स्थित स्थाई आश्रय गृह में व्यवस्थाएं ठीक होने के साथ ही साफ-सफाई भी दिखी। यहां ठंड से बचाव के इंतजाम किए गए हैं। आश्रय गृह के कर्मचारी अशोक कुमार ने बताया कि यहां रुकने के लिए आने वाले यात्रियों का आधार कार्ड, नाम पता देखने के बाद ही रुकने दिया जाता है।
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