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पेंजिम च्वींग की अधूरी रह गई हसरत, चीन को सबक सिखाना चाहता था
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 22 Jul 2017 10:30 PM IST
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पेंजिम च्वींग
- फोटो : अमर उजाला
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आठ दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने वाले पेंजिम च्वींग ने मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान में साफ कहा था कि उसने तिब्बत की आजादी के लिए आत्मदाह किया है। वह चाहता था कि भारत और अन्य पड़ोसी देश मिलकर चीन को सबक सिखाएं और तिब्बत को आजाद कराएं।
वह तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से खासा प्रभावित था। इसका जिक्र उसने अपने साथियों से भी किया था।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रमुख लोबसंग सिंगो 13 जुलाई को सारनाथ पहुंचे थे।
उसी दिन उन्होंने केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय परिसर में दिए गए भाषण में तिब्बत की आजादी का मुद्दा उठाया था। पेंजिम ने रात में भी अपने साथियों से लोबसंग सिंगो के भाषण का जिक्र किया था।
चर्चा यह भी रही कि उसने अपने एक दोस्त को लिखे पत्र में भी तिब्बत की आजादी समेत कई बातें लिखी थीं। हालांकि पत्र का पता नहीं चल सका है
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वह तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से खासा प्रभावित था। इसका जिक्र उसने अपने साथियों से भी किया था।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रमुख लोबसंग सिंगो 13 जुलाई को सारनाथ पहुंचे थे।
उसी दिन उन्होंने केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय परिसर में दिए गए भाषण में तिब्बत की आजादी का मुद्दा उठाया था। पेंजिम ने रात में भी अपने साथियों से लोबसंग सिंगो के भाषण का जिक्र किया था।
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चर्चा यह भी रही कि उसने अपने एक दोस्त को लिखे पत्र में भी तिब्बत की आजादी समेत कई बातें लिखी थीं। हालांकि पत्र का पता नहीं चल सका है
पेप्टीसीमिया का बढ़ता जा रहा था खतरा
अस्पताल में भर्ती तिब्बती छात्र
- फोटो : अमर उजाला
पेंजिम च्वींग को घटना के बाद एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां प्राइवेट वार्ड में चार दिन इलाज के बाद उसे महमूरगंज स्थित एक अन्य हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था। यहां प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबोध सिंह के निर्देशन में उसका इलाज चला लेकिन बेहतर इलाज के लिए उसे गुरुवार को दिल्ली के सफरदजंग अस्पताल भेज दिया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि पेंजिम के ज्यादा जलने से घाव इतने गहरे हो गए थे कि धीरे-धीरे पेप्टीसीमिया(कीटाणुओं का अधिक हो जाना जो शरीर के अंगों को दुष्प्रभावित करते हैं) के लक्षण दिखने लगे थे। इस तरह के केस में शुरूआत में स्किन जल जाने से कीटाणु खत्म हो जाते हैं और बहुत जल्द ही बनने भी लगते हैं।
पांच-छह दिन में कीटाणु इतने अधिक हो जाते हैं कि घाव सड़ने जैसा होने लगता है और इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में करीब ढाई दिन तक इलाज के दौरान जांच रिपोर्ट तो नार्मल रही लेकिन पेप्टीसीमिया के लक्षण दिख रहे थे। प्राय: इतने अधिक जलने वाले मरीजों की जान बचा पाना मुश्किल होता है।
चिकित्सकों ने बताया कि पेंजिम के ज्यादा जलने से घाव इतने गहरे हो गए थे कि धीरे-धीरे पेप्टीसीमिया(कीटाणुओं का अधिक हो जाना जो शरीर के अंगों को दुष्प्रभावित करते हैं) के लक्षण दिखने लगे थे। इस तरह के केस में शुरूआत में स्किन जल जाने से कीटाणु खत्म हो जाते हैं और बहुत जल्द ही बनने भी लगते हैं।
पांच-छह दिन में कीटाणु इतने अधिक हो जाते हैं कि घाव सड़ने जैसा होने लगता है और इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में करीब ढाई दिन तक इलाज के दौरान जांच रिपोर्ट तो नार्मल रही लेकिन पेप्टीसीमिया के लक्षण दिख रहे थे। प्राय: इतने अधिक जलने वाले मरीजों की जान बचा पाना मुश्किल होता है।